भारत की हवाई सुरक्षा होगी और मजबूत: रूस से Pantsir-S1M सिस्टम लेने की चर्चा तेज

नई दिल्ली भारत की सीमाओं पर बदलते सुरक्षा हालात के बीच देश की रक्षा रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पश्चिम में पाकिस्तान, उत्तर में चीन और पूर्वी सीमाओं पर उभरती नई चुनौतियों ने भारत को अपनी हवाई सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में तेज कदम उठाने के लिए मजबूर किया है। हाल के सैन्य अभियानों के अनुभवों के बाद यह साफ हो गया है कि भविष्य के संघर्षों में ड्रोन, मिसाइल और लो-लेवल एयर थ्रेट्स सबसे बड़ी चुनौती होंगे।

इसी को ध्यान में रखते हुए भारतीय वायुसेना, थलसेना और नौसेना अपने एयर डिफेंस नेटवर्क को बहुस्तरीय और अधिक प्रभावी बनाने पर काम कर रही हैं। स्वदेशी प्रणालियों के साथ-साथ रणनीतिक साझेदार देशों से अत्याधुनिक सिस्टम शामिल करने की योजना पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

भारत पहले ही लंबी दूरी की सुरक्षा के लिए S-400 एयर डिफेंस सिस्टम को अपने बेड़े में शामिल कर चुका है, जिसकी क्षमताओं को हालिया सैन्य अभ्यासों में परखा जा चुका है। इसके अलावा भविष्य की जरूरतों को देखते हुए और अधिक उन्नत तकनीक पर चर्चा जारी है।

कम दूरी की सुरक्षा पर विशेष जोर
अब भारतीय सेना की नजर शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम पर है, जो सीमा पर तैनात अग्रिम इकाइयों, सैन्य ठिकानों और संवेदनशील क्षेत्रों को तुरंत सुरक्षा प्रदान कर सकें। इसी क्रम में सेना अपने नए CADET (कैरीयर एयर डिफेंस ट्रैक्ड) प्लेटफॉर्म को विकसित कर रही है। यह एक ऐसा साझा ट्रैक्ड प्लेटफॉर्म होगा, जिस पर अलग-अलग प्रकार के एयर डिफेंस हथियार तैनात किए जा सकेंगे।

रक्षा सूत्रों के मुताबिक, इस प्लेटफॉर्म के लिए ऐसे सिस्टम की तलाश है जो तेजी से मूव कर सकें, कम ऊंचाई पर आने वाले खतरों को तुरंत निष्क्रिय कर सकें और आधुनिक युद्ध की जरूरतों के अनुरूप हों।

रूस के Pantsir सिस्टम पर फिर नजर
इसी जरूरत के चलते रूस की Pantsir सीरीज की वायु रक्षा प्रणाली एक बार फिर चर्चा में आई है। पहले भी इस सिस्टम को लेकर प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन विभिन्न कारणों से वह आगे नहीं बढ़ सकी। अब नए प्लेटफॉर्म और बदली रणनीतिक आवश्यकताओं के चलते इस विकल्प पर दोबारा विचार किया जा रहा है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना आगे बढ़ती है, तो इससे भारत की एयर डिफेंस क्षमता को लो-लेवल और क्लोज रेंज थ्रेट्स के खिलाफ बड़ी मजबूती मिलेगी। साथ ही यह कदम भारत की मल्टी-लेयर एयर डिफेंस रणनीति को और प्रभावी बना सकता है।

फिलहाल आधिकारिक स्तर पर किसी सौदे की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन संकेत साफ हैं कि आने वाले समय में भारत की हवाई सुरक्षा को और अधिक सशक्त बनाने के लिए महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं।

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