नई दिल्ली। रूस और यूक्रेन के बीच दो साल से अधिक समय से जारी युद्ध को लेकर एक बड़ा संकेत सामने आया है। अमेरिका के पूर्व यूक्रेन विशेष दूत कीथ केलॉग ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच शांति वार्ता निर्णायक मोड़ पर पहुँच चुकी है और युद्ध खत्म कराने वाला समझौता अब पहले से कहीं अधिक करीब है।
केलॉग के अनुसार, बातचीत दो महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित है—पहला, डोनबास क्षेत्र की भविष्य की स्थिति, और दूसरा, जापोरिज्जिया न्यूक्लियर पावर प्लांट का नियंत्रण, जो फिलहाल रूस के हाथों में है। उन्होंने कहा कि यही दो बिंदु शांति वार्ता के अंतिम और सबसे संवेदनशील हिस्से हैं।
पिछले हफ्तों में अमेरिका का एक प्रारंभिक शांति मसौदा लीक होने से यूक्रेन और कई यूरोपीय देशों में असंतोष बढ़ गया था। आरोप था कि वह ड्राफ्ट रूस की अधिकांश शर्तों को स्वीकार करने जैसा था। इसमें यूक्रेन की नाटो सदस्यता रोकने, रूस के कब्जे वाले क्षेत्रों को मान्यता देने और यूक्रेनी सेना की क्षमता सीमित करने जैसे प्रावधान बताए गए थे।
क्रेमलिन के सूत्रों का कहना है कि संशोधित मसौदे में अब 27 बिंदु हैं और इसे चार भागों में विभाजित किया गया है, हालांकि इसकी वास्तविक सामग्री सार्वजनिक नहीं की गई है। लीक हुए मसौदे के अनुसार, जापोरिज्जिया प्लांट को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा संस्था (IAEA) की निगरानी में दोबारा चलाने और उससे उत्पन्न बिजली रूस–यूक्रेन के बीच बराबर बांटने का प्रस्ताव था।
वर्तमान में रूस, यूक्रेन के लगभग 19% क्षेत्र पर नियंत्रण बनाए हुए है। इसमें 2014 में कब्जाया गया क्रीमिया, पूरा लुहान्स्क, डोनेट्स्क का अधिकांश क्षेत्र और खेरसॉन व जापोरिज्जिया के बड़े हिस्से शामिल हैं। इसके अलावा खार्किव, सुमी, मायकोलाइव और द्निप्रोपेट्रोव्स्क के कुछ इलाकों पर भी रूसी सेना तैनात है।
गौरतलब है कि फरवरी 2022 में रूस ने बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान की शुरुआत की थी, जबकि दोनों देशों के बीच तनाव 2014 से ही जारी था। अब कूटनीतिक हलचलें तेज होने के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि संघर्ष समाप्ति की दिशा में आने वाले दिनों में बड़ा कदम देखा जा सकता है।