मॉस्को/यूरोप: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि यदि राजनीतिक दबाव से मुक्त माहौल बनाया जाए तो रूस यूरोपीय देशों को तेल और गैस की आपूर्ति फिर से शुरू करने के लिए तैयार है। उनका कहना है कि ऊर्जा सहयोग तभी संभव है जब यह दीर्घकालिक और स्थिर समझौते के आधार पर हो।
पुतिन का यह बयान ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखी जा रही है। हाल के वैश्विक तनावों के बाद कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं, जिससे कई देशों में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है।
रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि रूस एशियाई देशों के साथ अपने ऊर्जा व्यापार को जारी रखे हुए है और अगर यूरोप भी स्थायी और भरोसेमंद सहयोग का संकेत देता है तो आपूर्ति पर बातचीत की जा सकती है। उन्होंने खास तौर पर हंगरी और स्लोवाकिया जैसे देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन देशों को तेल की आपूर्ति जारी रखने की संभावना बनी हुई है।
गौरतलब है कि यूरोपीय संघ ने वर्ष 2022 में रूस से समुद्री मार्ग से आने वाले कच्चे तेल के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके अलावा यूक्रेन के रास्ते आने वाली द्रुज्बा पाइपलाइन में आई समस्याओं के कारण भी कुछ यूरोपीय देशों तक रूसी तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है।
इसी बीच हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बान ने यूरोपीय संघ से अपील की है कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल की बढ़ती कीमतों को देखते हुए रूस पर लगाए गए ऊर्जा प्रतिबंधों की समीक्षा की जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते ऊर्जा संकट के बीच रूस और यूरोप के बीच ऊर्जा सहयोग का मुद्दा एक बार फिर वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण बन गया है।