धार्मिक आयोजनों की शुचिता पर सर्व हिंदू समाज का कड़ा रुख; प्रशासन से की ‘नाम पट्टिका’ अनिवार्य करने की मांग

दुर्ग। हिंदू धार्मिक क्षेत्रों, मेलों और शोभायात्राओं की पवित्रता बनाए रखने के लिए सर्व हिंदू समाज ने एकजुट होकर प्रशासन के समक्ष अपनी मांगों का एक चार्टर रखा है। समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों और मेलों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश और व्यापारिक दखल को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे।

सुरक्षा और शुचिता पर जताई चिंता

प्रशासन को सौंपे गए मांग पत्र में कहा गया है कि धार्मिक आयोजनों में पहचान छिपाकर व्यापार करने वाले असामाजिक तत्वों के कारण विवाद की स्थितियां बनती हैं। समाज ने आरोप लगाया कि पहचान छिपाकर व्यापार करने वाले लोग न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करते हैं, बल्कि महिलाओं के साथ अभद्रता और खाद्य पदार्थों में अशुद्धता (थूक, गंदगी आदि) मिलाने जैसी घटनाओं को भी अंजाम देते हैं।

हरिद्वार और कुंभ की तर्ज पर मांग

सर्व हिंदू समाज ने मांग की है कि जिस तरह हरिद्वार की हर की पौड़ी और कुंभ क्षेत्र में मर्यादा का पालन सुनिश्चित किया जाता है, उसी प्रकार जिले के सभी धार्मिक मेलों और क्षेत्रों में भी व्यवस्था लागू की जाए।

प्रमुख मांगें:

प्रवेश एवं व्यापार पर रोक: हिंदुओं के धार्मिक कार्यक्रमों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश और व्यापारिक गतिविधियों को पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाए।

प्रोपराइटर का नाम अनिवार्य: जिले के सभी छोटे-बड़े व्यापारियों और ठेलों पर प्रोपराइटर का नाम और पहचान स्पष्ट रूप से बोर्ड पर लिखना अनिवार्य किया जाए।

कड़ी सुरक्षा व्यवस्था: सभी धार्मिक शोभायात्राओं और आयोजनों में पुलिस प्रशासन द्वारा पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात किया जाए ताकि पथराव और विवाद की घटनाओं को रोका जा सके।

प्रतिनिधियों का कहना है कि यह निर्णय धार्मिक अनुष्ठानों की पवित्रता और समाज की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।

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