नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट ने महादेव सट्टेबाजी एप के फरार सह-संस्थापक रवि उप्पल के दुबई से भागकर अज्ञात स्थान पर चले जाने पर गंभीर नाराजगी जताई है। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को निर्देश दिया है कि उप्पल का तुरंत पता लगाया जाए और उसे हिरासत में सुनिश्चित किया जाए। न्यायालय ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे आरोपी अदालतों और जांच एजेंसियों को “खेल” समझने की अनुमति नहीं पाएंगे।
न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने उप्पल के कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचने के प्रयासों को गंभीरता से लिया। पीठ ने कहा कि ऐसे मामलों में हमारी अंतरात्मा झकझोर जाती है और अदालत को कार्रवाई करनी ही होगी। पीठ ने कहा, “ऐसे सरगनाओं के लिए अदालतें और जांच एजेंसियां सिर्फ खेलने का साधन नहीं हैं। हमें कार्रवाई करनी होगी।”
सुप्रीम कोर्ट ने ईडी को स्पष्ट निर्देश दिया कि उप्पल को ढूंढा जाए और हिरासत में लिया जाए। अदालत ने कहा, “हमें पता लगाना होगा कि उसे कैसे हिरासत में लिया जाए। ऐसा प्रतीत होता है कि वह लगातार स्थान बदलकर भागने में माहिर है।”
उप्पल ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के 22 मार्च के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें रायपुर की निचली अदालत में लंबित मनी लॉन्ड्रिंग मामले की सुनवाई में शामिल होने का निर्देश दिया गया था। ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने बताया कि उप्पल 2023 में दुबई में हिरासत में था, लेकिन बाद में वह फरार हो गया। संयुक्त अरब अमीरात के अधिकारियों ने प्रत्यर्पण प्रक्रिया रोक दी। राजू ने कहा कि उप्पल ऐसे स्थानों पर जा सकता है जहां भारत के साथ प्रत्यर्पण संधि नहीं है, जैसे ब्रिटिश वर्जिन द्वीप समूह।
पीठ ने अगली सुनवाई 14 नवंबर के लिए तय की। अदालत ने उप्पल के वकील को चेताया कि उन्हें अपने मुवक्किल को भारत लौटने और जांच का सामना करने के लिए राजी करना होगा। न्यायमूर्ति सुंदरेश ने कहा, “उन्हें हर समय भागते रहने की अनुमति नहीं होगी। प्रक्रिया में शामिल होना अनिवार्य है। उचित समय पर उनकी जमानत याचिका पर विचार किया जाएगा।”
6,000 करोड़ का घोटाला:
उप्पल को इंटरपोल रेड नोटिस के कारण दिसंबर 2023 में दुबई में हिरासत में लिया गया था। जांच एजेंसियों के अनुसार, उप्पल ने अपने सहयोगी सौरभ चंद्राकर के साथ मिलकर 2018 में महादेव सट्टेबाजी एप शुरू किया था। दावा है कि यह घोटाला करीब 6,000 करोड़ रुपये का है।
सौरभ चंद्राकर को अक्टूबर 2024 में दुबई में गिरफ्तार किया गया था और उनका प्रत्यर्पण अभी लंबित है। छत्तीसगढ़ पुलिस की जांच के आधार पर इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को भी आरोपी बनाया गया था, जिसे बाद में सीबीआई को सौंप दिया गया।