रायपुर। छत्तीसगढ़ में चल रही SIR प्रक्रिया को लेकर उपमुख्यमंत्री ने कड़ा और महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन व्यक्तियों का नाम वर्तमान मतदाता सूची में दर्ज है, लेकिन वर्ष 2003 की वोटर लिस्ट में उनके किसी भी नजदीकी रिश्तेदार का विवरण नहीं मिलता, ऐसे मामलों में कानूनी जांच की जाएगी। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जांच के बाद संदिग्ध पाए जाने वालों पर विदेशी नागरिकों से जुड़े कानूनों सहित अन्य प्रावधानों के तहत कार्रवाई संभव है।
मीडिया से बातचीत में उन्होंने बताया कि जिन घरों में अधिकारी गणना पत्र बाँट रहे हैं, वह वर्ष 2025 की मतदाता सूची पर आधारित है। इन दस्तावेज़ों का मिलान पुरानी सूची से किया जाएगा, ताकि परिवारों का रिकॉर्ड सत्यापित किया जा सके।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विदेशी नागरिकों के लिए बनाए गए कानून भारतीय नागरिकों पर सीधे-सीधे लागू नहीं होते, लेकिन संदिग्ध स्थिति में संबंधित विभाग जांच के बाद उचित कदम उठाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, SIR प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन और सटीक करना है। इसके लिए टीमों को घर-घर जाकर दस्तावेज़ों का सत्यापन करने, लोगों को प्रक्रिया के बारे में समझाने और गलत सूचनाओं को रोकने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन का मानना है कि जागरूकता बढ़ने से प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी व व्यवस्थित तरीके से पूरी होगी।