लखनऊ। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की कानूनी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। नेता प्रतिपक्ष एवं सांसद राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को लखनऊ की एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने नोटिस जारी किया है। अदालत ने सभी को निर्देश दिया है कि वे एक कथित विवादित बयान के मामले में 5 जनवरी 2026 तक अपना पक्ष स्पष्ट करें।
यह मामला एक अधिवक्ता द्वारा दाखिल परिवाद से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी ने जनवरी 2025 में कांग्रेस मुख्यालय के उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान ऐसा बयान दिया, जिसे भारत की संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ माना गया है। कोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद मामले को गंभीर मानते हुए सभी नामजद नेताओं को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया।
संवैधानिक व्यवस्था पर टिप्पणी का आरोप
परिवाद में कहा गया है कि राहुल गांधी के बयान में प्रयुक्त शब्दों का आशय केवल किसी राजनीतिक दल तक सीमित नहीं था, बल्कि संसद, न्यायपालिका, कार्यपालिका और पूरी संवैधानिक प्रणाली की ओर संकेत करता है। इसी आधार पर बयान को राष्ट्रहित के विपरीत बताते हुए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गई है।
सामूहिक जिम्मेदारी का दावा
परिवादी की ओर से यह भी दलील दी गई कि कार्यक्रम के दौरान मंच पर मौजूद वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने बयान का न तो विरोध किया और न ही कोई स्पष्टीकरण दिया। इससे यह संकेत मिलता है कि वक्तव्य व्यक्तिगत नहीं बल्कि संगठनात्मक सहमति से दिया गया।
अदालत ने मांगा जवाब
एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने सभी पक्षों को नोटिस जारी करते हुए स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई में यह तय किया जाएगा कि मामले में आगे कौन-सी कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाए। फिलहाल अदालत ने किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से परहेज करते हुए जवाब दाखिल करने का अवसर दिया है।
इस प्रकरण को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं और आने वाले समय में यह मामला सियासी और कानूनी दोनों दृष्टि से अहम माना जा रहा है।