कोर्टरूम में सख्ती: CJI ने वकील के रवैये पर जताई नाराज़गी, अनुशासन पर दिया जोर

नई दिल्ली। झारखंड हाईकोर्ट में जज के साथ अनुशासनहीन व्यवहार और तीखी बहस के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित वकील को कड़ी चेतावनी दी है। आपराधिक अवमानना के नोटिस को चुनौती देने पहुंचे वकील महेश तिवारी को शीर्ष अदालत में राहत की जगह सख्त टिप्पणियों का सामना करना पड़ा।

मामले की सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने वकील के रवैये पर गहरी नाराजगी जाहिर की। सीजेआई ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अदालत की गरिमा से ऊपर कोई नहीं है और यदि कोई न्यायालय को चुनौती देने का प्रयास करेगा, तो सुप्रीम कोर्ट उसे गंभीरता से लेगा।

“माफी ही एकमात्र रास्ता”

सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि वकील केवल यह साबित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट आए हैं कि उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। उन्होंने दो टूक कहा कि यदि वकील सच में गलती स्वीकार करते हैं, तो उन्हें बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए।
सीजेआई ने चेताया कि न्यायपालिका को आंख दिखाने की मानसिकता स्वीकार्य नहीं है और ऐसी सोच रखने वालों को अदालत की शक्ति का अहसास कराया जाएगा।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि यदि वकील पश्चाताप के साथ माफी मांगते हैं, तो झारखंड हाईकोर्ट उनके मामले में सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपना सकता है।

क्या है पूरा विवाद

यह विवाद 16 अक्टूबर का है, जब झारखंड हाईकोर्ट में एक विधवा महिला के बिजली कनेक्शन काटे जाने से जुड़ी याचिका पर सुनवाई हो रही थी। महिला पर लगभग 1.30 लाख रुपये का बकाया था। सुनवाई के दौरान जज ने वकील के तर्क रखने के तरीके पर आपत्ति जताई और इस पर बार काउंसिल का ध्यान आकृष्ट करने की बात कही।

इसी दौरान वकील और जज के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। आरोप है कि वकील ने न केवल आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया, बल्कि न्यायालय की मर्यादा को भी चुनौती दी। इस घटनाक्रम के बाद झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना का नोटिस जारी किया था।

न्यायालय की सख्त संदेश

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को न्यायपालिका में अनुशासन और मर्यादा बनाए रखने के कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि न्यायालय की गरिमा से समझौता किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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