संगीत महाविद्यालय, दुर्ग के छात्र छात्राओं ने किया सिया देवी मंदिर एवं तांडुला जलाशय का भ्रमण

दुर्ग।नवीन शासकीय संगीत महाविद्यालय के छात्रों ने एक यादगार शैक्षिक यात्रा पूरी की, जिसमें सिया देवी मंदिर (बालोद जिला) और तांडुला जलाशय का भ्रमण शामिल था। यह यात्रा न केवल ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व की स्थलों से परिचय कराने वाली थी, बल्कि छात्रों के बीच आपसी भाईचारे एवं टीम स्पिरिट को मजबूत करने का भी माध्यम बनी।

प्राचार्य डॉ ऋचा ठाकुर के मार्गदर्शन में यह यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न हुई। यात्रा के सारथी रहे जगदीश बामनिया, यशवंत साहू, वत्सल तिवारी एवं जीवनंदन वर्मा। डॉ निधि वर्मा, भारती जंघेल सरला साहू, तपन नाथ के कुशल प्रबंधन से पूरी यात्रा सुव्यवस्थित, सुरक्षित एवं आनंदपूर्ण रही।

यात्रा का प्रथम पड़ाव था श्री सिया देवी मंदिर, जो बालोद जिले के नरगांव क्षेत्र में स्थित है। यह प्राचीन मंदिर देवी सीता (सिया देवी) को समर्पित है। स्थानीय लोककथाओं एवं रामायण से जुड़े इतिहास के अनुसार, वनवास के दौरान भगवान राम, लक्ष्मण एवं माता सीता ने दंडकारण्य में इस क्षेत्र में निवास किया था।

मंदिर के आसपास की प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगल एवं पास ही स्थित प्राकृतिक झरना इसे एक आध्यात्मिक एवं पर्यटन स्थल बनाते हैं। सब ने यहां पूजा-अर्चना की और मंदिर परिसर में संगीतात्मक प्रस्तुति दी, जिसमें विभिन्न रागों एवं लोक गीतों के माध्यम से भक्ति भाव व्यक्त किया गया। यह प्रस्तुति पर्यटकों एवं स्थानीय लोगों को भी आकर्षित कर पाई।

दोपहर में छात्रों ने तांडुला डैम का भ्रमण किया, जो बालोद जिले में तांडुला एवं सुखा नाला नदियों के संगम पर स्थित है। यह बांध ब्रिटिश काल में 1910 में निर्माण शुरू होकर 1921 में पूर्ण हुआ था। इसका जलाशय क्षेत्र लगभग 827 वर्ग किमी है तथा कुल भंडारण क्षमता 302-312 मिलियन घन मीटर है। यह दुर्ग-भिलाई क्षेत्र को पेयजल एवं भिलाई इस्पात संयंत्र को औद्योगिक जल उपलब्ध कराता है।

 डैम की शांत जलराशि, हरियाली एवं सूर्यास्त का नजारा देख छात्र मंत्रमुग्ध हो गए। यहां भी छात्रों ने संगीत प्रस्तुति दी, जिससे परिसर में एक सांस्कृतिक उत्सव जैसा माहौल बन गया। यात्रा की सबसे खास बात रही। सीनियर एवं जूनियर छात्रों के बीच का आपसी संबंध और भी गहरा एवं सौहार्दपूर्ण हो गया। सभी ने एक-दूसरे की मदद की, हंसी-मजाक किया और मिलकर यादें सृजित की। यह यात्रा केवल ज्ञानार्जन की नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास एवं टीमवर्क की भी मिसाल बनी।

गुंडरदेही में सुबह का नाश्ता एवं शाम की चाय बेहद स्वादिष्ट एवं ताजगी भरी रही। बालोद में मिला लाजवाब खाना एवं वहां का शानदार सत्कार सभी के दिल को छू गया। स्थानीय लोगों की मेहमाननवाजी ने यात्रा को और भी स्मरणीय बना दिया। प्राचार्य डाँ ऋचा ठाकुर ने कहा, ‘ऐसी यात्राएं छात्रों को किताबी ज्ञान से आगे बढ़ाकर वास्तविक जीवन की सीख देती है। संगीत महाविद्यालय के छात्रों ने न केवल स्थलों का ऐतिहासिक महत्व समझा, बल्कि संगीत के माध्यम से अपनी कला भी प्रस्तुत की।यह यात्रा महाविद्यालय के लिए एक गौरवपूर्ण क्षण रही और छात्रों के लिए जीवन भर की याद बन गई।

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