घरेलू हवाई यात्रा के बढ़ते किरायों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र सरकार और DGCA को नोटिस

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने घरेलू हवाई यात्रा के बढ़ते किरायों और एयरलाइंस की मनमानी पर दाखिल याचिका की सोमवार को सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और DG सिविल एविएशन को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने आदेश दिया कि दोनों पक्ष चार हफ्तों के भीतर जवाब दें।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि एयरलाइंस ‘डायनेमिक प्राइसिंग’ के नाम पर टिकट के किरायों में मनमानी वृद्धि कर रही हैं। टिकट की कीमतें कभी भी अचानक बहुत बढ़ जाती हैं, जिससे यात्रियों पर भारी बोझ पड़ता है। कई बार एक ही उड़ान की टिकट कुछ घंटों में ही काफी महंगी हो जाती है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि एयरलाइंस चेक-इन बैगेज की सीमा घटाकर 25 किलो से 15 किलो कर रही हैं, जिससे यात्रियों को अतिरिक्त बैगेज शुल्क चुकाना पड़ता है। इसे याचिकाकर्ता ने आम यात्रियों का शोषण बताया।

याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि देश के नागरिक उड्डयन क्षेत्र में किराया निर्धारण का कोई पारदर्शी तरीका नहीं है। एयरलाइंस अपने एल्गोरिदम के माध्यम से किराए बढ़ाती हैं, जिसमें यात्रियों के हितों का ध्यान नहीं रखा जाता। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि इस पूरे सिस्टम की जांच कराई जाए और सरकार को स्पष्ट नियम बनाने का निर्देश दिया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत नोटिस जारी किया और कहा कि यह मामला विचार योग्य है। चार हफ्तों में सरकार का जवाब मिलने के बाद आगे सुनवाई होगी।

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