कोलकाता: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को लेकर चल रहे विवाद पर सुनवाई करते हुए भारत का सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि बड़ी संख्या में फॉर्म-6 जमा होना कोई असामान्य घटना नहीं है। अदालत ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान इस तरह के आवेदन पहले भी बड़ी संख्या में जमा होते रहे हैं। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि किसी नाम को लेकर आपत्ति है तो संबंधित पक्ष भारत निर्वाचन आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज करा सकता है। ⚖️
यह मामला तब सामने आया जब तृणमूल कांग्रेस की ओर से अदालत में दावा किया गया कि एक ही व्यक्ति द्वारा हजारों फॉर्म-6 जमा किए गए हैं। पार्टी की ओर से कहा गया कि पूरक मतदाता सूची जारी होने के बाद भी नए आवेदन स्वीकार किए जा रहे हैं, जिससे पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सुनवाई के दौरान अदालत की पीठ ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया में इस तरह की स्थिति पहले भी देखी गई है और इसे असामान्य नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी मतदाता के नाम को लेकर संदेह होने पर चुनाव आयोग के पास आपत्ति दर्ज कराने का विकल्प उपलब्ध है।
निर्वाचन आयोग की ओर से पेश पक्ष ने अदालत को बताया कि नियमों के अनुसार उम्मीदवारों के नामांकन की अंतिम तिथि तक पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में जोड़े जा सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति हाल ही में 18 वर्ष का हुआ है तो उसे मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने का पूरा अधिकार है।
सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि किसी भी मामले में जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है और पूरी प्रक्रिया को समझना आवश्यक है। अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनाव उसी मतदाता सूची के आधार पर कराए जाते हैं जो तय समय सीमा तक अपडेट की जाती है। साथ ही संकेत दिया कि इस मामले से जुड़ी आपत्तियों पर जल्द निर्णय लिया जाएगा।