दुर्ग, 3 दिसंबर। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में अहिवारा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत स्थित प्राचीन ‘बान बरद’ का विष्णु मंदिर आस्था का एक अनूठा केंद्र है। यह मंदिर देश का संभवतः एकमात्र ऐसा धार्मिक स्थल है, जहाँ यह मान्यता है कि गौ हत्या जैसे महापाप के श्राप से मुक्ति मिलती है। यहाँ भगवान विष्णु अपनी पत्नी माता लक्ष्मी के साथ विराजमान हैं।
द्वापर युग की पौराणिक कथा
इस मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा द्वापर युग की है। मान्यताओं के अनुसार, भगवान कृष्ण और राक्षस बाणासुर के बीच हुए युद्ध के दौरान, बाणासुर ने छलपूर्वक भगवान कृष्ण की कई गायों का वध कर दिया था। इस कृत्य के कारण बाणासुर पर गौ हत्या का भयंकर पाप लग गया।

इस पाप से मुक्ति पाने के लिए जब बाणासुर ने भगवान कृष्ण से प्रार्थना की, तब भगवान कृष्ण ने उसे एक उपाय बताया। कृष्ण ने बाणासुर से कहा कि वह बान बरद की बावड़ी में खुदाई करे, वहाँ प्राप्त होने वाली भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करे और कुंड में स्नान करे।
पापमोचन कुंड और मंदिर
भगवान कृष्ण के बताए निर्देशानुसार, बाणासुर द्वारा निर्मित वह प्राचीन बावड़ी आज भी मंदिर के समीप मौजूद है, जिसे ‘पापमोचन कुंड’ के नाम से जाना जाता है। इसी कुंड की खुदाई के दौरान भगवान विष्णु की भव्य प्रतिमा प्राप्त हुई थी, जिसे बावड़ी के पास ही स्थापित किया गया। यह स्थल अब प्राचीन विष्णु मंदिर के रूप में प्रसिद्ध है।

तीर्थ स्थल के रूप में पहचान
कलयुग में इस स्थान को एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल के रूप में पूजा जाता है। भक्तों की असीम श्रद्धा के चलते यहाँ अन्य देवी-देवताओं के छोटे मंदिर भी निर्मित किए गए हैं, लेकिन मुख्य आकर्षण केंद्र आज भी वही प्राचीन विष्णु मंदिर है।

इस मंदिर की निगरानी छत्तीसगढ़ पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग के हाथों में सुरक्षित है। हर साल माघ पूर्णिमा के अवसर पर यहाँ एक भव्य मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें छत्तीसगढ़ के कोने-कोने से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं और भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।