नई दिल्ली :केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा दिया। दक्षिण 24 परगना में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने राज्य की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला। शाह ने कहा कि तुष्टिकरण की राजनीति से किसी भी राज्य का विकास संभव नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल भारी कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है और राज्य की आर्थिक स्थिति चिंताजनक हो चुकी है। मदरसों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता पर भी उन्होंने सवाल उठाए।
अपने भाषण में अमित शाह ने अन्य राज्यों की विपक्षी राजनीति पर भी निशाना साधा। उन्होंने बिहार, असम और तमिलनाडु की राजनीति का उल्लेख करते हुए परिवारवाद का आरोप लगाया और कहा कि कुछ दल लोकतंत्र को परिवार तक सीमित कर रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने तेजस्वी यादव, गौरव गोगोई और एमके स्टालिन की राजनीति की भी आलोचना की।
शाह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की “परिवर्तन यात्रा” का उद्देश्य पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बदलाव लाना है। उनके मुताबिक भाजपा राज्य में सत्ता में आकर भ्रष्टाचार समाप्त करना और विकास को गति देना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि तुष्टिकरण की नीतियों के कारण राज्य की प्रगति प्रभावित हुई है और कानून-व्यवस्था की स्थिति भी कमजोर हुई है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए शाह ने कहा कि अगर तृणमूल कांग्रेस फिर से सत्ता में आती है तो सरकार का संचालन ममता बनर्जी नहीं बल्कि उनके भतीजे करेंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री राज्य के विकास की बजाय अपने रिश्तेदार को आगे बढ़ाने की राजनीति कर रही हैं। साथ ही उन्होंने पूर्व डीजीपी राजीव कुमार को राज्यसभा भेजे जाने के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में राज्य में भ्रष्टाचार बढ़ा।
घुसपैठ के मुद्दे पर भी अमित शाह ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस की नीतियों के कारण पश्चिम बंगाल घुसपैठियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बन गया है। शाह ने भरोसा दिलाया कि यदि भाजपा की सरकार बनती है तो अवैध घुसपैठ पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी और सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा को और मजबूत किया जाएगा।
इसके साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि किसी भी हिंदू शरणार्थी की नागरिकता नहीं छीनी जाएगी। शाह ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों से भी वादा किया कि भाजपा सत्ता में आने पर उन्हें सातवें वेतन आयोग के अनुसार वेतन देने की व्यवस्था करेगी।