
DESK । बाजार में फेयरनेस क्रीम से लेकर महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स तक, चेहरे की खूबसूरती को लेकर तमाम दावे किए जाते हैं। लेकिन क्या वाकई ये दावे सच होते हैं? स्किन केयर को लेकर समाज में कई मिथक (अंधविश्वास) हैं, जिन्हें आज भी सच मान लिया जाता है। आइए जानते हैं कुछ आम मिथक और उनके पीछे छिपी सच्चाई:
मिथ: व्हाइटनिंग क्रीम से रंग गोरा होता है
सच: बाजार में बिकने वाली फेयरनेस और व्हाइटनिंग क्रीम आपके असली स्किन टोन को गोरा नहीं बना सकती। ये प्रोडक्ट्स सिर्फ त्वचा की ऊपरी परत की सफाई कर उसे एक शेड लाइट कर सकते हैं, जिससे चेहरा कुछ समय के लिए निखरा हुआ दिखता है। डीप क्लींजिंग से भी रंग गोरा नहीं होता, बस स्किन की टोन थोड़ी क्लियर होती है।
मिथ: महंगे प्रोडक्ट ही असरदार होते हैं
सच: महंगे प्रोडक्ट्स अक्सर अच्छी क्वालिटी के होते हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि हर महंगा प्रोडक्ट आपकी स्किन को सूट करे। वहीं कई सस्ते प्रोडक्ट्स भी बेहतरीन परिणाम दे सकते हैं, यदि वे आपकी स्किन टाइप के अनुरूप हों। स्किन केयर में प्रोडक्ट की कीमत से ज्यादा जरूरी है कि वो आपकी त्वचा को सूट करे।
मिथ: मेकअप करने से स्किन खराब हो जाती है
सच: सही तरीके से किया गया मेकअप और मेकअप के बाद सही क्लीनिंग स्किन को नुकसान नहीं पहुंचाती। बल्कि अच्छे प्रोडक्ट्स और हाइजीन का ध्यान रखते हुए मेकअप से चेहरा और भी खूबसूरत नजर आता है। स्किन खराब तभी होती है जब मेकअप रेमूव नहीं किया जाता या घटिया प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल किया जाता है।
मिथ: बार-बार चेहरा धोने से त्वचा साफ होती है
सच: बार-बार चेहरा धोने से स्किन की प्राकृतिक नमी खत्म हो जाती है, जिससे चेहरा रूखा और ड्राई हो सकता है। स्किन एक्सपर्ट्स के मुताबिक दिन में 2 बार फेसवॉश करना ही पर्याप्त होता है। अधिक बार चेहरा धोने से स्किन की नेचुरल ऑयल बैलेंस बिगड़ सकता है।
मिथ: स्किन केयर सिर्फ महिलाओं के लिए होती है
सच: स्किन केयर का मतलब है अपनी त्वचा की सही देखभाल। इसमें जेंडर का कोई फर्क नहीं पड़ता। पुरुषों को भी फेसवॉश, मॉइश्चराइजर और सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना चाहिए। अच्छी स्किन हाइजीन हर किसी के लिए जरूरी है।