मुंबई : मुंबई से आई जानकारी के अनुसार, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने शेयर बाजार में कारोबार को आसान बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। बाजार नियामक ने ट्रेडिंग से जुड़े मौजूदा ढांचे को सरल और अधिक व्यावहारिक बनाने के लिए नए सुधार प्रस्ताव सामने रखे हैं, जिससे निवेशकों और बाजार सहभागियों पर अनुपालन का बोझ कम किया जा सके।
सेबी द्वारा जारी परामर्श पत्र (कंसल्टेशन पेपर) में यह संकेत दिया गया है कि स्टॉक एक्सचेंज और कमोडिटी एक्सचेंज—दोनों के लिए नियमों को एकरूप और सरल बनाने की योजना है। इसका मकसद बाजार में व्यापार को सहज बनाना और अनावश्यक जटिलताओं को खत्म करना है।
प्रस्ताव के तहत ट्रेडिंग प्रक्रिया, प्राइस बैंड, सर्किट ब्रेकर, कॉल ऑक्शन, बल्क और ब्लॉक डील से जुड़े नियमों में मौजूद दोहराव को समाप्त कर उन्हें एकीकृत करने की सिफारिश की गई है। इसके साथ ही बाजार में तरलता (लिक्विडिटी) बढ़ाने से जुड़ी योजनाओं को भी नए सिरे से व्यवस्थित करने का सुझाव दिया गया है।
सेबी के अनुसार, कुल 54 नियमों में बदलाव या विलय का प्रस्ताव है, जिनमें इक्विटी और कमोडिटी—दोनों सेगमेंट को एक साझा फ्रेमवर्क में लाने की बात कही गई है। इन नियमों में मार्जिन ट्रेडिंग सुविधा, क्लाइंट कोड, पैन से जुड़े प्रावधान, ट्रेडिंग का समय और दैनिक मूल्य सीमा जैसे अहम पहलू शामिल हैं।
नियामक ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि बल्क डील और ब्लॉक डील से संबंधित खुलासे (डिस्क्लोजर) के नियमों को एक साथ जोड़ा जाए और उन्हें अधिक स्पष्ट बनाया जाए। इसके तहत एक्सचेंजों के बीच पूरी होने वाले सौदों की जानकारी ग्राहक स्तर पर साझा की जा सकेगी।
इसके अलावा, क्लियरिंग कॉरपोरेशंस से जुड़े नियमों के लिए अलग मास्टर सर्कुलर जारी करने की योजना है, ताकि नियामकीय टकराव को रोका जा सके। सेबी ने यह भी कहा है कि क्लाइंट कोड या ओटीआर में संशोधन पर लगाए जाने वाले जुर्माने सभी एक्सचेंजों और क्लियरिंग संस्थानों में समान होने चाहिए।
गौरतलब है कि इससे पहले केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी वित्तीय क्षेत्र में नियमों को सरल करने, लागत घटाने और अनुपालन को सुगम बनाने पर जोर दे चुकी हैं। सेबी का यह प्रस्ताव उसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।