नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच फोन पर बातचीत हुई। यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने मंगलवार को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। बातचीत के दौरान खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित और निर्बाध जहाजरानी बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया गया। यह समुद्री मार्ग दुनिया में तेल और गैस की सप्लाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
युद्ध के बीच पहली बातचीत
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष शुरू होने के बाद यह दोनों नेताओं के बीच पहली टेलीफोनिक बातचीत मानी जा रही है। हाल के हफ्तों में क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है और समुद्री मार्गों पर सुरक्षा को लेकर कई देशों की चिंता सामने आई है।
ऊर्जा आपूर्ति पर असर की आशंका
ईरान से जुड़े तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में हमलों और संभावित रुकावटों की खबरों ने वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित किया है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है, इसलिए यहां की स्थिति देश के लिए बेहद अहम बन गई है।
भारत का कूटनीति पर जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में संसद में भी इस मुद्दे को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा कि भारत सभी संबंधित देशों के संपर्क में है और तनाव कम करने के लिए संवाद और कूटनीतिक रास्ते को ही सबसे बेहतर विकल्प मानता है।
अमेरिका-ईरान संबंधों पर स्थिति
वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उनके प्रतिनिधियों और ईरान के बीच बातचीत के सकारात्मक संकेत मिले हैं। हालांकि ईरान की ओर से इस तरह की किसी औपचारिक बातचीत से इनकार किया गया है।
पश्चिम एशिया की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए दुनिया भर के देश यही कोशिश कर रहे हैं कि तनाव को कम किया जाए और महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग खुले व सुरक्षित बने रहें।