भारत की पहली राष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी नीति ‘प्रहार’ का अनावरण, सुरक्षा ढांचे को मिलेगा नया आयाम

नई दिल्ली केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सोमवार को भारत की पहली राष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी नीति और रणनीति ‘प्रहार’ का अनावरण किया। इसे आतंकवाद के सभी रूपों से निपटने की दिशा में देश के दीर्घकालिक प्रयासों में एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

उभरते सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए व्यापक ढांचा

‘प्रहार’ नीति सीमा पार आतंकवाद, ड्रोन हमलों, साइबर खतरों और संगठित आतंकी नेटवर्क जैसी जटिल सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए एक संरचित और समग्र राष्ट्रीय ढांचा प्रस्तुत करती है। दस्तावेज में स्पष्ट किया गया है कि आतंकवाद को किसी धर्म, जातीयता, राष्ट्रीयता या सभ्यता से जोड़ना अनुचित है। सरकार ने आतंकवाद के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को दोहराया है।

मानवाधिकार और कानून के शासन पर जोर

नीति में रोकथाम, त्वरित प्रतिक्रिया और अंतर-एजेंसी समन्वय को मजबूत करने के साथ-साथ मानवाधिकारों के सम्मान और कानून के शासन के पालन पर विशेष बल दिया गया है। नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कानूनी और न्यायिक प्रक्रियाओं को और सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई गई है।

सात स्तंभों पर आधारित आतंकवाद-रोधी ढांचा

‘प्रहार’ नीति भारत के आतंकवाद-विरोधी ढांचे के सात प्रमुख स्तंभों को परिभाषित करती है—

  1. आतंकी हमलों की रोकथाम
  2. त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया
  3. सुरक्षा एजेंसियों की क्षमता वृद्धि
  4. मानवाधिकारों के अनुरूप संचालन
  5. कट्टरता के मूल कारणों का समाधान
  6. अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा
  7. सामाजिक लचीलापन और जागरूकता बढ़ाना

वैश्विक नेटवर्क और तकनीकी खतरों पर नजर

नीति में वैश्विक आतंकी संगठनों जैसे अल-कायदा और आईएसआईएस द्वारा स्लीपर सेल सक्रिय करने की कोशिशों का उल्लेख किया गया है। साथ ही ड्रोन तकनीक, एन्क्रिप्टेड डिजिटल प्लेटफॉर्म, डार्क वेब और क्रिप्टोकरेंसी के बढ़ते उपयोग को भी गंभीर सुरक्षा चुनौती बताया गया है।

महत्वपूर्ण अवसंरचना और सीमा सुरक्षा सुदृढ़

नीति के तहत भूमि, समुद्री और हवाई सीमाओं पर उन्नत निगरानी प्रणाली तैनात करने की योजना है। रेलवे, विमानन नेटवर्क, बंदरगाह, रक्षा प्रतिष्ठान और परमाणु ऊर्जा सुविधाओं की सुरक्षा भी और मजबूत की जाएगी।

आतंकी घटनाओं की स्थिति में स्थानीय पुलिस को प्रथम प्रतिक्रिया बल के रूप में तैयार किया जाएगा, जबकि बड़े अभियानों में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। जांच कार्यों में राष्ट्रीय जांच एजेंसी प्रमुख भूमिका निभाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि ‘प्रहार’ नीति देश की आंतरिक सुरक्षा संरचना को अधिक समन्वित, उत्तरदायी और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने में अहम साबित होगी।

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