गैस संकट पर छत्तीसगढ़ विधानसभा में हंगामा, विपक्ष का स्थगन प्रस्ताव खारिज

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान गुरुवार को घरेलू गैस (एलपीजी) संकट को लेकर सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला। गैस आपूर्ति में कमी और बढ़ती कीमतों के मुद्दे पर विपक्ष ने स्थगन प्रस्ताव लाकर चर्चा कराने की मांग की, लेकिन सत्तापक्ष ने इसे केंद्र सरकार का विषय बताते हुए इसका विरोध किया। स्थगन प्रस्ताव पेश होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस शुरू हो गई, जो बाद में हंगामे में बदल गई।

हंगामे के बीच सभापति ने विपक्ष का स्थगन प्रस्ताव नामंजूर कर दिया, जिसके बाद कांग्रेस विधायकों ने सदन के गर्भगृह में पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया।

इस दौरान भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने स्थगन प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए कहा कि घरेलू गैस आपूर्ति और उससे जुड़ी नीतियां केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती हैं, इसलिए इस विषय पर राज्य विधानसभा में चर्चा नहीं की जा सकती। उनके इस बयान के बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस और तेज हो गई।

वहीं नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने स्थगन प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि प्रदेश में गैस सिलेंडर की कमी से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पहले दावा कर रही थी कि गैस की कोई कमी नहीं है, लेकिन जमीनी स्थिति इससे अलग है।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि प्रदेश में गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी हो रही है और आम लोगों को आसानी से सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार व्यवस्था सुधारना चाहती है तो इस विषय पर विधानसभा में चर्चा होनी चाहिए।

सदन में बढ़ते हंगामे और नारेबाजी के बीच कार्यवाही को कुछ समय के लिए स्थगित करना पड़ा। कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर भी विवाद थमने का नाम नहीं लिया और अंततः सभापति ने विपक्ष का स्थगन प्रस्ताव नामंजूर कर दिया। इसके विरोध में कांग्रेस विधायक सदन के गर्भगृह में पहुंचकर प्रदर्शन करने लगे, जबकि हंगामे के दौरान कई विपक्षी विधायकों को निलंबित भी कर दिया गया।

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