नई दिल्ली: राज्यसभा में सोमवार को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण को लेकर जोरदार हंगामा देखने को मिला। धर्म के आधार पर आरक्षण के कथित दुरुपयोग के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए, जिसके बाद विपक्षी दलों ने सदन से बहिर्गमन कर दिया।
शून्यकाल के दौरान भाजपा सांसद के. लक्ष्मण ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि ओबीसी आरक्षण का आधार सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ापन होना चाहिए, न कि धर्म। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राज्यों में मुस्लिम समुदाय को ओबीसी श्रेणी में शामिल कर आरक्षण का लाभ दिया जा रहा है, जिसकी समीक्षा की जानी चाहिए।
इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे समाज को बांटने वाला विषय बताया। उप नेता प्रतिपक्ष प्रमोद तिवारी ने कहा कि इस तरह के मुद्दे उठाकर पिछड़े वर्गों के अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। इसके बाद विपक्षी सांसदों ने विरोध जताते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।
विपक्ष के बहिर्गमन पर सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विपक्ष महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा से बचने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ दल वोटबैंक की राजनीति के कारण इस मुद्दे पर खुली बहस से बच रहे हैं।
सरकार की ओर से कहा गया कि वह इस विषय पर सदन में चर्चा के लिए तैयार है। वहीं विपक्ष का कहना है कि आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दों को राजनीतिक लाभ के लिए नहीं उठाया जाना चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम के कारण कुछ समय के लिए सदन की कार्यवाही भी प्रभावित रही।