नए साल की छुट्टियों में बड़ी संख्या में लोग पहाड़ों और ऊंचाई वाले पर्यटन स्थलों का रुख कर रहे हैं। हालांकि, ऐसे सफर के दौरान कई यात्रियों को पेट से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ब्लोटिंग, गैस, अपच और भारीपन जैसी शिकायतें आम हो जाती हैं। इसके पीछे सिर्फ खानपान नहीं, बल्कि शरीर में होने वाले आंतरिक बदलाव जिम्मेदार होते हैं।
ऑक्सीजन की कमी से बिगड़ता है पाचन तंत्र
हाई एल्टीट्यूड पर वातावरण में ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है, जिसे मेडिकल भाषा में हाइपोक्सिया कहा जाता है। इस स्थिति में शरीर का नर्वस सिस्टम प्रभावित होता है, जिसका सीधा असर पाचन प्रक्रिया पर पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऑक्सीजन की कमी से पेट और आंतों की कार्यप्रणाली धीमी हो जाती है।
वेगस नर्व पर पड़ता है असर
पाचन को नियंत्रित करने वाली वेगस नर्व ऊंचाई पर ठीक से काम नहीं कर पाती। इसके कारण आंतों की गति सुस्त हो जाती है, पाचन एंजाइम समय पर सक्रिय नहीं होते और पेट खाली होने में अधिक समय लगता है। नतीजतन गैस, सूजन और असहजता बढ़ जाती है।
ठंड और ट्रैवल स्ट्रेस भी बढ़ाते हैं समस्या
ऊंचाई पर ठंडा मौसम शरीर को ‘एनर्जी बचाने’ की स्थिति में ले जाता है। इस दौरान शरीर का सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय हो जाता है, जिसे ‘फाइट या फ्लाइट’ मोड कहा जाता है। इससे शरीर पाचन को प्राथमिकता नहीं देता। वहीं, लंबा सफर और खानपान में बदलाव आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया यानी माइक्रोबायोम के संतुलन को भी बिगाड़ देता है।
सफर से पहले पेट को ऐसे करें तैयार
पोषण विशेषज्ञों की सलाह है कि पहाड़ों की यात्रा पर निकलने से पहले शरीर को धीरे-धीरे तैयार किया जाए। हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन करें, पर्याप्त पानी पिएं और ऐसे स्नैक्स चुनें जो गट हेल्थ को सपोर्ट करें। जिस तरह ट्रिप के लिए सामान सोच-समझकर पैक किया जाता है, उसी तरह पेट की तैयारी भी जरूरी है।
सावधानी से बढ़ेगा ट्रिप का मजा
अगर सही खानपान और हाइड्रेशन का ध्यान रखा जाए, तो ऊंचाई पर होने वाली पेट की परेशानियों से काफी हद तक बचा जा सकता है। इससे न सिर्फ यात्रा आरामदायक बनेगी, बल्कि पहाड़ों की खूबसूरती का आनंद भी बिना किसी परेशानी के लिया जा सकेगा।