नई दिल्ली : देश की संसद का शीतकालीन सत्र आगामी 1 दिसंबर से शुरू होगा और 20 दिसंबर तक चलेगा। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इसकी आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि यह सत्र कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण रहेगा, क्योंकि इसमें देशहित से जुड़े कई अहम विधेयकों पर चर्चा और निर्णय होने की संभावना है।
सरकार की योजना इस सत्र में तीन से चार नए विधेयक पेश करने की है। इनमें चुनाव सुधार, न्यायिक प्रक्रियाओं के सरलीकरण और नागरिक सुविधाओं में सुधार से जुड़े प्रावधान शामिल हो सकते हैं। साथ ही, कुछ पुराने लंबित विधेयकों पर भी विचार-विमर्श कर उन्हें पारित कराने की दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि सरकार लोकतांत्रिक संवाद को और सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से सहयोग की अपील करते हुए कहा —
“संसद लोकतंत्र का मंदिर है, जहां हर दल को अपने विचार रखने और देश के विकास में योगदान देने का अवसर मिलता है। हमारा उद्देश्य सार्थक चर्चा के माध्यम से नीतिगत निर्णयों को आगे बढ़ाना है।”
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सत्र आगामी लोकसभा चुनावों से पहले का अंतिम या अंतिम से पहले का सत्र हो सकता है। ऐसे में सरकार जनता से जुड़े कई बड़े फैसलों को इसी दौरान अमलीजामा पहनाने का प्रयास करेगी।
शीतकालीन सत्र से राजनीतिक हलचल तेज होने की पूरी उम्मीद है, जहां नीति, राजनीति और विकास—तीनों पर गरमागरम बहस देखने को मिल सकती है।