दुर्ग। बिजली विभाग की लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी शनिवार को उस वक्त उजागर हुई, जब 33 केवी लाइन के मेंटेनेंस के दौरान मजदूरों की जान जोखिम में डालकर काम कराया गया। आधे शहर की बिजली गुल कर चल रहे इस कार्य में सुरक्षा संसाधनों का भारी अभाव दिखा, जिससे किसी भी वक्त बड़ी अनहोनी हो सकती थी।
न हेलमेट, न दस्ताने: मौत से खेल रहे कर्मचारी
33 केवी लाइन में कैप केबल लगाने के दौरान नियम-कानूनों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं। करीब 40 से 60 फीट ऊंचे खंभों पर मजदूर बिना सेफ्टी बेल्ट, हेलमेट और दस्तानों के चढ़कर काम करते नजर आए। चौंकाने वाली बात यह है कि मौके पर विभाग के अधिकारी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने इस जानलेवा लापरवाही को रोकने की जहमत नहीं उठाई।

जिम्मेदारी का खेल
जब सुरक्षा में इस बड़ी चूक पर सवाल उठाए गए, तो बिजली विभाग के अधिकारियों ने पल्ला झाड़ते हुए पूरी जिम्मेदारी ठेकेदार पर डाल दी। वहीं, ठेकेदार ने अपने बचाव में मजदूरों को ही लापरवाह बताते हुए कहा कि उन्हें संसाधन दिए गए थे लेकिन उन्होंने पहने नहीं। इस आरोप-प्रत्यारोप के बीच सवाल यह उठता है कि यदि काम के दौरान कोई बड़ा हादसा हो जाता, तो उसका जिम्मेदार कौन होता?

सवालों के घेरे में सुरक्षा मानक
तस्वीरें साफ बयां कर रही हैं कि सुरक्षा के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। क्या विभाग और प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं? मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना ठेकेदार और विभाग दोनों की वैधानिक जिम्मेदारी है, लेकिन दुर्ग में इसे ताक पर रख दिया गया है। अब देखना यह है कि क्या उच्च अधिकारी इस लापरवाही पर संज्ञान लेकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे या फिर अगली बार भी मजदूरों की जान इसी तरह दांव पर लगाई जाएगी।