Gupt Navratri 2026 : हिंदू सनातन परंपरा में नवरात्रि को अत्यंत पुण्यदायी और मंगलकारी पर्व माना गया है। नवरात्रि के नौ दिनों तक आदिशक्ति मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की श्रद्धा और विधि-विधान से आराधना की जाती है। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार वर्ष में चार नवरात्रि आती हैं, जिनमें चैत्र और शारदीय नवरात्रि सार्वजनिक रूप से मनाई जाती हैं, जबकि माघ और आषाढ़ मास की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है।
गुप्त नवरात्रि विशेष रूप से साधना और तप के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दौरान मां दुर्गा की दस महाविद्याओं की गोपनीय विधि से आराधना की जाती है। मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि में की गई साधना से साधक के जीवन के संकट दूर होते हैं और उसे माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
माघ गुप्त नवरात्रि का शुभ आरंभ
वैदिक पंचांग के अनुसार माघ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से गुप्त नवरात्रि की शुरुआत होती है। प्रतिपदा तिथि का आरंभ 19 जनवरी 2026, सोमवार को दोपहर लगभग 1:21 बजे से होगा, जबकि इसका समापन 20 जनवरी 2026, मंगलवार को दोपहर लगभग 2:14 बजे होगा। उदया तिथि के अनुसार माघ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ 19 जनवरी 2026 को माना जाएगा।
पहले दिन मां काली, दूसरे दिन मां तारा की उपासना
गुप्त नवरात्रि के प्रथम दिन मां काली की पूजा का विधान बताया गया है। मान्यता है कि मां काली को गुड़ का भोग अति प्रिय है और पूजा के पश्चात इस भोग को जरूरतमंदों में बांटने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है। मां काली को शीघ्र प्रसन्न होने वाली देवी कहा गया है।
गुप्त नवरात्रि के दूसरे दिन मां तारा की पूजा का विशेष महत्व है। मां तारा की साधना रात्रि के समय, एकांत और पूर्ण श्रद्धा के साथ करने का विधान बताया गया है। उन्हें नीले रंग के वस्त्र, नीले पुष्प और आम का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है।
मां तारा की महिमा
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार मां तारा की उपासना स्वयं भगवान बुद्ध ने भी की थी। इसके साथ ही मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के गुरु महर्षि वशिष्ठ, लंकापति रावण और स्वयं भगवान शिव द्वारा भी मां तारा की आराधना किए जाने का उल्लेख मिलता है। शास्त्रों में मां तारा को दस महाविद्याओं में दूसरा स्थान प्राप्त है और उन्हें देवी पार्वती का दिव्य स्वरूप माना गया है।
साधना से मिलता है ऐश्वर्य और आध्यात्मिक बल
मां तारा को धन, वैभव, ऐश्वर्य और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि में मां तारा की सच्चे मन से की गई उपासना से साधक को भौतिक सुखों के साथ-साथ आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी प्राप्त होता है।