नई दिल्ली: वर्ष 2025 भारत के लिए कूटनीतिक दृष्टि से बेहद सफल रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल अपनी विदेश यात्राओं के माध्यम से देश की वैश्विक भूमिका को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। कुल 20 देशों के दौरे और करीब 38 दिनों की यात्राओं में प्रधानमंत्री ने भारत की क्षमताओं, रणनीतियों और प्राथमिकताओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से प्रस्तुत किया।
सहयोग और साझेदारी को बढ़ावा:
प्रधानमंत्री मोदी के विदेश दौरों का मुख्य उद्देश्य देशों के बीच सहयोग और साझेदारी को मजबूत करना रहा। इन यात्राओं में आर्थिक, रणनीतिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में नए अवसर तलाशे गए और भारत को विश्व पटल पर एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में स्थापित किया गया।
मुख्य विदेश दौरे और प्रमुख पड़ाव:
- फ्रांस और अमेरिका (10-14 फरवरी 2025): लगातार तीसरे कार्यकाल की शुरुआत में प्रधानमंत्री ने यूरोप और अमेरिका का दौरा कर रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को सुदृढ़ किया।
- मॉरीशस (11-12 मार्च 2025) और थाईलैंड व श्रीलंका (3-6 अप्रैल 2025): दक्षिण एशियाई और हिंद-प्रशांत क्षेत्रों में भारत की उपस्थिति मजबूत की गई।
- सऊदी अरब (22 अप्रैल 2025): ऊर्जा और निवेश के मुद्दों पर द्विपक्षीय समझौतों पर बल।
- साइप्रस, कनाडा, क्रोएशिया (15-19 जून 2025) और घाना, त्रिनिदाद-टोबैगो, अर्जेंटीना, ब्राजील, नामीबिया (2-9 जुलाई 2025): वैश्विक आर्थिक एवं व्यापारिक संबंधों को विस्तार दिया गया।
- ब्रिटेन और मालदीव (23-26 जुलाई 2025): रणनीतिक सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत किया।
- जापान और चीन (28 अगस्त – 1 सितंबर 2025): एशिया में भारत की कूटनीतिक भूमिका को सुदृढ़ किया।
- भूटान (11-12 नवंबर 2025) और दक्षिण अफ्रीका (21-23 नवंबर 2025): क्षेत्रीय सहयोग और अंतरराष्ट्रीय मंच पर सामूहिक रणनीतियों को आगे बढ़ाया।
- जॉर्डन, इथियोपिया, ओमान (15-18 दिसंबर 2025): वर्ष के अंतिम दौरों में पश्चिम एशियाई और अफ्रीकी देशों के साथ रणनीतिक और निवेश संबंधों को मजबूत किया गया।
विश्व पटल पर भारत की नई पहचान:
प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्राओं ने न केवल भारत की वैश्विक छवि को मजबूत किया बल्कि देश को एक भरोसेमंद और प्रभावशाली वैश्विक खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया। इन दौरों से भारत की कूटनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक पहलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई गति मिली।
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2025 के इन 20 दौरे भारत की वैश्विक कूटनीति के लिए मील का पत्थर साबित हुए और 2026 में इसे और आगे बढ़ाने की नींव रखी गई।