धर्म डेस्क। आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर मनाई जाने वाली आषाढ़ विनायक चतुर्थी, जिसे अनिरुद्ध चतुर्थी भी कहा जाता है, इस वर्ष 17 जुलाई, शुक्रवार को मनाई जाएगी। भगवान श्रीगणेश को समर्पित इस व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। इस बार विनायक चतुर्थी पर करीब 13 घंटे तक रवि योग का शुभ संयोग बन रहा है, जिसे मांगलिक कार्यों और पूजा-पाठ के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। हालांकि, धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन चंद्रमा का दर्शन करना वर्जित माना गया है।
वैदिक पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि का आरंभ 17 जुलाई सुबह 6:27 बजे होगा और इसका समापन 18 जुलाई सुबह 4:42 बजे होगा। उदया तिथि के आधार पर विनायक चतुर्थी का व्रत 17 जुलाई को रखा जाएगा।
पूजा का शुभ मुहूर्त
व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को भगवान गणेश की पूजा के लिए सुबह 11:05 बजे से दोपहर 1:50 बजे तक लगभग 2 घंटे 45 मिनट का शुभ मुहूर्त मिलेगा। इस दौरान विधि-विधान से गणपति की पूजा करने से विघ्नों का नाश और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होने की मान्यता है।
13 घंटे रहेगा रवि योग
विनायक चतुर्थी के दिन रवि योग सुबह 5:34 बजे से शाम 6:34 बजे तक रहेगा। इस योग में सूर्य का प्रभाव अधिक होने के कारण इसे दोषरहित और अत्यंत शुभ माना जाता है। वहीं, व्यतीपात योग रात 10:46 बजे तक रहेगा, जिसके बाद वरीयान योग प्रारंभ होगा। मघा नक्षत्र शाम 6:34 बजे तक रहेगा, इसके बाद पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र का आरंभ होगा।
भूलकर भी न देखें चंद्रमा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विनायक चतुर्थी के दिन चंद्रमा का दर्शन नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति पर झूठे आरोप लग सकते हैं। इस दिन चंद्रोदय सुबह 8:37 बजे और चंद्रास्त रात 9:33 बजे होगा। ऐसे में लगभग 12 घंटे 56 मिनट तक चंद्रमा का दर्शन करने से बचने की सलाह दी जाती है।
शाम से लगेगी भद्रा
इस बार विनायक चतुर्थी की शाम 5:29 बजे से भद्रा प्रारंभ होगी, जो 18 जुलाई सुबह 4:42 बजे तक रहेगी। भद्रा का वास पृथ्वी लोक में माना गया है। इसलिए इस अवधि में नए या शुभ कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, विनायक चतुर्थी का व्रत और भगवान गणेश की पूजा भद्रा से प्रभावित नहीं होगी।