रायपुर। भारतमाला परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण के दौरान हुए बड़े आर्थिक घोटाले में EOW (Economic Offences Wing) ने बड़ी कार्रवाई की है। रायपुर की विशेष अदालत में एजेंसी ने लगभग 8,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें एसडीएम, पटवारी और भू-माफिया समेत 10 लोगों को आरोपी बनाया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने सरकारी भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा करके लगभग ₹43 करोड़ का नुकसान सरकारी खजाने को पहुंचाया।
सरकारी धन के दुरुपयोग की परतें
EOW की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी केदार, हरमीत और भोजराम ने भूमि अधिग्रहण की कीमतों में हेराफेरी कर मुआवज़ा बढ़ाया। कई जगहों पर एक ही जमीन के लिए दो बार भुगतान, और कुछ किसानों के नाम पर झूठे भुगतान किए गए। इस तरह सरकारी दर से कई गुना अधिक राशि का वितरण किया गया।
मिलीभगत और फर्जी प्रस्ताव
जांच में यह भी पता चला कि तत्कालीन एसडीएम कार्यालय ने बिना पर्याप्त सत्यापन के भूमि अधिग्रहण प्रस्ताव पास किए। संबंधित पटवारी और भू-माफिया के बीच मिलीभगत के स्पष्ट प्रमाण मिले। आरोपियों ने बाजार दर से कई गुना अधिक मूल्यांकन कराकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया।
अब तक की सबसे बड़ी EOW चार्जशीट
चार्जशीट में सैकड़ों दस्तावेज़, बैंक रिकॉर्ड और गवाहों के बयान शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक अपराध से जुड़ा चालान है। जांच अभी जारी है और कुछ अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई का संदेश
भारतमाला परियोजना का उद्देश्य देशभर में मजबूत सड़क और राजमार्ग नेटवर्क तैयार करना है। लेकिन भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में यह घोटाला प्रशासनिक प्रणाली पर सवाल खड़ा करता है। EOW की यह कार्रवाई सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी नीति और जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।