दुर्ग में 2025 की अंतिम नेशनल लोक अदालत आयोजित, 10 लाख से अधिक मामले निराकृत

दुर्ग। वर्ष 2025 की चौथी और अंतिम नेशनल लोक अदालत का आयोजन जिला न्यायालय एवं तहसील व्यवहार न्यायालयों में 13 दिसंबर को किया गया। इस अवसर पर जिला न्यायालय दुर्ग, कुटुंब न्यायालय, व्यवहार न्यायालय भिलाई-3, पाटन, धमधा, किशोर न्याय बोर्ड, श्रम न्यायालय, स्थायी लोक अदालत, राजस्व न्यायालय और उपभोक्ता फोरम में कुल 32 खंडपीठों का गठन किया गया।

प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग के निर्देशन में आयोजित इस अदालत में कुल 10,03,886 मामलों का समाधान हुआ और 5.72 करोड़ रुपये से अधिक की अवार्ड राशि वितरित की गई। इसमें दंडिक, सिविल, परिवार, मोटर दुर्घटना, बैंकिंग, विद्युत एवं दूरसंचार से संबंधित प्री-लिटिगेशन मामले शामिल थे।

अदालत में पक्षकारों के बीच आपसी समझौते पर मामलों का त्वरित समाधान किया गया। विशेष रूप से घरेलू हिंसा, पति-पत्नी विवाद, पारिवारिक झगड़े, उधार राशि के वसूली, जेठानी-देवरानी विवाद जैसे संवेदनशील मामले भी शांति और समझौते के साथ निपटाए गए।

नेशनल लोक अदालत के दौरान सामाजिक एवं जनहित कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। दुर्ग जिला ब्लड सेंटर और रेडकास सोसायटी जीवनदीप समिति की मदद से मोबाइल ब्लड कलेक्शन वैन में रक्तदान शिविर लगाया गया। जिला चिकित्सालय दुर्ग के सहयोग से एक दिवसीय निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर भी आयोजित किया गया।

इसके अलावा गुरूद्वारा शहीद बाबादीप सिंह एवं गुरूसिंह सभा गुरूद्वारा के सहयोग से उपस्थित लोगों के लिए निःशुल्क भोजन की व्यवस्था की गई। केंद्रीय जेल दुर्ग द्वारा जेल बंदियों द्वारा निर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी और विक्रय भी आयोजित हुई, जिसे उपस्थित लोगों ने सराहा।

प्रधान जिला न्यायाधीश ने अदालत भ्रमण के दौरान पक्षकारों, बैंक प्रबंधकों और आम जनता से सीधे बातचीत की तथा रक्तदान का योगदान भी दिया।

इस आयोजन में न्यायिक भातृत्व और समाजिक सौहार्द के साथ साल 2025 की अंतिम नेशनल लोक अदालत ने 21,610 न्यायालयीन प्रकरण और 9,82,276 प्री-लिटिगेशन प्रकरण का सफलतापूर्वक समाधान किया।

मुख्य मामले:

  • धारा 420 भा.दं.सं. का मामला आपसी समझौते से समाप्त, 4.5 लाख रुपये का निपटान।
  • घरेलू हिंसा से संबंधित विवाद आपसी राजीनामा से सुलझाए गए।
  • पति-पत्नी के बीच वर्षों से चला आ रहा विवाद समझौते से समाप्त।
  • निजी खर्च हेतु उधार ली गई राशि के विवाद का शांतिपूर्ण समाधान।
  • जेठानी-देवरानी विवाद भी आपसी समझौते से निपटाया गया।

नेशनल लोक अदालत न केवल कानूनी विवादों का समाधान करती है, बल्कि टूटते परिवारों को जोड़ने, सामाजिक सौहार्द बनाए रखने और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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