‘केजी के बच्चे को भी समझ आएगा’, परिसीमन पर अमित शाह का तंज

नई दिल्ली: संसद में महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए दक्षिण भारत के प्रतिनिधित्व को लेकर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित बदलावों से दक्षिणी राज्यों की ताकत घटेगी नहीं, बल्कि बढ़ेगी।

सदन में बोलते हुए शाह ने बताया कि वर्तमान में लोकसभा की 543 सीटों में दक्षिण भारत के राज्यों का प्रतिनिधित्व 129 सीटों का है, जो प्रस्तावित बदलावों के बाद बढ़कर लगभग 195 तक पहुंच सकता है। उन्होंने विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम को खारिज करते हुए कहा कि यह दावा पूरी तरह तथ्यहीन है।

दक्षिणी राज्यों की सीटों पर क्या होगा असर?

अमित शाह ने विभिन्न राज्यों के उदाहरण देते हुए कहा कि कर्नाटक की सीटें 28 से बढ़कर 42 हो सकती हैं, आंध्र प्रदेश में 25 से 38, तेलंगाना में 17 से 26, तमिलनाडु में 39 से 59 और केरल में 20 से 30 सीटें होने का अनुमान है। उनका कहना था कि इन बदलावों के बाद इन राज्यों का प्रतिशत प्रतिनिधित्व भी संतुलित रूप से बना रहेगा।

विपक्ष पर साधा निशाना

गृहमंत्री ने विपक्षी नेताओं पर आरोप लगाया कि वे जनता के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस विधेयक और अन्य प्रस्तावों को लेकर गलत जानकारी दी जा रही है, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है।

जनगणना को लेकर भी दी सफाई

जातीय जनगणना के मुद्दे पर शाह ने कहा कि सरकार इससे पीछे नहीं हट रही है। उन्होंने बताया कि जनगणना की प्रक्रिया दो चरणों में होती है—पहले मकानों का सर्वे और फिर लोगों की जानकारी जुटाई जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान व्यवस्था में मकानों के आधार पर जातीय आंकड़े नहीं लिए जाते।

850 सीटों का आंकड़ा कैसे?

लोकसभा की संभावित सीट संख्या को लेकर उठ रहे सवालों पर शाह ने उदाहरण देकर समझाया कि यदि किसी व्यवस्था में आरक्षण लागू करना होता है, तो सीटों की संख्या बढ़ानी पड़ती है। इसी आधार पर 850 सीटों का आंकड़ा एक अनुमानित संख्या के रूप में सामने आया है।

गृहमंत्री ने अंत में कहा कि सरकार सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए संतुलित और पारदर्शी तरीके से निर्णय ले रही है, जिससे किसी भी क्षेत्र के साथ अन्याय न हो।

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