भारत-न्यूजीलैंड के बीच ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट, व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार

नई दिल्ली: भारत और न्यूजीलैंड के बीच सोमवार को एक महत्वपूर्ण आर्थिक समझौता हुआ, जिसने दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को नई दिशा दी है। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) के तहत भारत से न्यूजीलैंड जाने वाले सभी उत्पादों पर अब पूरी तरह टैरिफ खत्म कर दिया गया है, जबकि न्यूजीलैंड से भारत आने वाले अधिकांश सामान पर शुल्क में बड़ी राहत दी गई है या उसे घटा दिया गया है।

इस समझौते पर हस्ताक्षर भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार मंत्री टॉड मैक्ले की मौजूदगी में किए गए। मार्च 2025 में शुरू हुई वार्ताएं महज नौ महीनों में पूरी हो गईं, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। इस करार के जरिए भारतीय उत्पादों को न्यूजीलैंड के बाजार में बिना शुल्क के प्रवेश मिलेगा, जिससे वस्त्र, चमड़ा, कालीन, सिरेमिक उत्पाद और ऑटोमोबाइल सेक्टर को खास फायदा होने की उम्मीद है।

समझौते में निवेश को लेकर भी बड़ी बात सामने आई है। न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर के निवेश का भरोसा दिया है, जिससे बुनियादी ढांचे और विभिन्न उद्योगों को मजबूती मिल सकती है। इसके साथ ही यह समझौता शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में भी नए अवसर खोलता है।

भारतीय छात्रों के लिए खास प्रावधान किए गए हैं, जिनके तहत वे न्यूजीलैंड में पढ़ाई के दौरान प्रति सप्ताह 20 घंटे तक काम कर सकेंगे और पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्हें कार्य वीजा की सुविधा भी मिलेगी। वहीं, कुशल भारतीय पेशेवरों को तीन साल तक वहां काम करने के लिए अस्थायी वीजा दिया जाएगा, हालांकि इसकी संख्या 5,000 तक सीमित रखी गई है।

इसके अलावा, वर्किंग हॉलिडे वीजा योजना के तहत हर साल 1,000 भारतीय युवाओं को एक वर्ष के लिए न्यूजीलैंड में रहने और काम करने का मौका मिलेगा। भारत ने इस समझौते में अपने संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की है, जिसमें डेयरी और कुछ कृषि उत्पादों को एफटीए से बाहर रखा गया है।

कुल मिलाकर, यह समझौता न केवल व्यापार बल्कि शिक्षा, रोजगार और निवेश के क्षेत्र में भी भारत और न्यूजीलैंड के संबंधों को और मजबूत करने वाला साबित हो सकता है।

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