नई दिल्ली। भारत का सर्वोच्च न्यायालय में सोमवार को मंदिरों के पुजारियों, सेवादारों और कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा एवं सम्मानजनक वेतन से जुड़े मुद्दे पर अहम सुनवाई होने जा रही है। यह सुनवाई अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर जनहित याचिका पर होगी। मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ करेगी।
याचिका में केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश देने की मांग की गई है कि सरकारी नियंत्रण वाले मंदिरों में कार्यरत पुजारियों एवं कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और अन्य सुविधाओं की समीक्षा के लिए न्यायिक आयोग या विशेषज्ञ समिति गठित की जाए।
याचिकाकर्ता का कहना है कि जब सरकार किसी मंदिर का प्रशासनिक और आर्थिक नियंत्रण अपने हाथ में लेती है, तो वहां कार्यरत कर्मचारियों के साथ नियोक्ता-कर्मचारी संबंध स्थापित हो जाता है। इसके बावजूद उन्हें सम्मानजनक वेतन और आवश्यक सुविधाएं नहीं मिल रही हैं, जो उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
याचिका में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु जैसे राज्यों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि कई मंदिर कर्मचारियों को अकुशल श्रमिकों के बराबर भी न्यूनतम वेतन नहीं मिल पा रहा। वहीं फरवरी 2025 में तमिलनाडु के एक मंदिर में पुजारियों द्वारा आरती की थाली में दक्षिणा लेने पर रोक लगाए जाने का भी हवाला दिया गया है, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित हुई है।
महंगाई और आर्थिक संकट के बीच मंदिर कर्मचारियों की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पुजारियों और सेवादारों को बड़ी उम्मीदें हैं।