अहमदाबाद। गुजरात की महत्वाकांक्षी कल्पसर परियोजना को साकार करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नीदरलैंड दौरे के दौरान भारत और नीदरलैंड के बीच जल प्रबंधन एवं समुद्री इंजीनियरिंग सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण सहमति बनी है। इस दौरान भारत के जल शक्ति मंत्रालय और नीदरलैंड के बुनियादी ढांचा एवं जल प्रबंधन मंत्रालय के बीच तकनीकी सहयोग के लिए आशय पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
प्रधानमंत्री मोदी ने नीदरलैंड के प्रसिद्ध जल प्रबंधन ढांचे ‘अफस्लुइटडिज्क’ का दौरा कर वहां इस्तेमाल की गई आधुनिक तकनीक का अध्ययन किया। विशेषज्ञों के अनुसार, यह परियोजना गुजरात की कल्पसर योजना के लिए उपयोगी मॉडल साबित हो सकती है। ‘अफस्लुइटडिज्क’ समुद्र के खारे पानी को रोककर मीठे पानी का विशाल जलाशय तैयार करने के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है।
कल्पसर परियोजना के तहत खंभात की खाड़ी में विशाल बांध बनाकर समुद्र में बहने वाली सात नदियों के जल का संरक्षण किया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य गुजरात को दीर्घकालिक जल सुरक्षा प्रदान करना, सिंचाई क्षमता बढ़ाना तथा परिवहन और ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत करना है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, परियोजना पूरी होने के बाद सौराष्ट्र क्षेत्र के 9 जिलों की 42 तहसीलों में लगभग 10 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। साथ ही दक्षिण गुजरात और सौराष्ट्र के बीच की दूरी में भी बड़ी कमी आएगी। योजना के माध्यम से पवन और सौर ऊर्जा उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।
मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल ने हाल ही में नीदरलैंड की राजदूत मारिसा गेरार्ड्स के साथ बैठक कर इंडो-डच विशेषज्ञ समूह और तकनीकी साझेदारी को लेकर चर्चा की थी। माना जा रहा है कि समुद्र में बांध निर्माण और जल प्रबंधन में नीदरलैंड का दशकों का अनुभव कल्पसर परियोजना को गति देने में अहम भूमिका निभाएगा।
गौरतलब है कि कल्पसर परियोजना की परिकल्पना प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए की थी। तकनीकी और पर्यावरणीय चुनौतियों के कारण परियोजना लंबे समय से लंबित रही, लेकिन अब भारत-नीदरलैंड सहयोग से इसके तेजी से आगे बढ़ने की उम्मीद बढ़ गई है।