नई दिल्ली। हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है। केंद्र सरकार और सरकारी तेल कंपनियों ने घरेलू एयरलाइंस को जेट फ्यूल (एटीएफ) की कीमतों में होने वाले भारी उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए नई ‘प्राइस स्टेबिलाइजेशन स्कीम’ शुरू की है। इस योजना के तहत घरेलू विमानन कंपनियों को अगले तीन वर्षों तक एक तय कीमत पर जेट फ्यूल उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे हवाई किराए में अचानक होने वाली बढ़ोतरी पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
सूत्रों के अनुसार, इस योजना में शामिल होने वाली एयरलाइंस को जेट फ्यूल 115 रुपये प्रति लीटर की निर्धारित कीमत पर उपलब्ध कराया जाएगा। यह दर तीन वर्षों तक स्थिर रहेगी। वहीं, योजना में शामिल न होने वाली एयरलाइंस को अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुरूप कीमत चुकानी होगी, जो वर्तमान में करीब 142 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुकी है।
नई स्वैच्छिक योजना के तहत 86.32 रुपये प्रति लीटर की एक बेंचमार्क कीमत तय की गई है। इसमें एयरपोर्ट शुल्क, तेल कंपनियों का मार्जिन और अन्य कर जोड़ने के बाद दिल्ली में एटीएफ की प्रभावी कीमत 115 रुपये, मुंबई में 114.5 रुपये और चेन्नई में 139 रुपये प्रति लीटर होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर विमानन क्षेत्र पर पड़ता है। ऐसे में यह योजना एयरलाइंस को लागत संबंधी अनिश्चितताओं से राहत देगी और यात्रियों को भी अप्रत्याशित किराया वृद्धि से बचाएगी।
तेल कंपनियों को संभावित नुकसान से बचाने और विमानन उद्योग को स्थिरता प्रदान करने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10,000 करोड़ रुपये के प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड को मंजूरी दी है। विमानन क्षेत्र में कुल परिचालन लागत का लगभग 40 से 60 प्रतिशत हिस्सा जेट फ्यूल पर खर्च होता है। ऐसे में यह कदम एयरलाइंस के लिए आर्थिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सरकार की इस पहल से घरेलू विमानन क्षेत्र को मजबूती मिलने के साथ-साथ यात्रियों को भी लंबे समय तक स्थिर और अपेक्षाकृत किफायती हवाई किराए का लाभ मिलने की उम्मीद है।