सरकार का बड़ा फैसला: डीजल और ATF निर्यात पर बढ़ा शुल्क, कंपनियों पर पड़ेगा असर

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने डीजल और विमानन टरबाइन ईंधन (ATF) के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में बढ़ोतरी कर दी है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार नई दरें 16 जून से लागू हो गई हैं और अगले 15 दिनों तक प्रभावी रहेंगी। हालांकि पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

संशोधित दरों के तहत डीजल निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क को 13.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 14 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं विमानन टरबाइन ईंधन (ATF) के निर्यात पर शुल्क 9.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 12.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क 1.5 रुपये प्रति लीटर पर यथावत रखा गया है।

सरकार ने घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर लागू मौजूदा शुल्क दरों में भी कोई बदलाव नहीं किया है। इससे आम उपभोक्ताओं पर तत्काल कोई अतिरिक्त असर पड़ने की संभावना नहीं है।

क्यों बढ़ाया गया विंडफॉल टैक्स?

सरकार का यह कदम रिफाइनरी कंपनियों को घरेलू आपूर्ति की बजाय निर्यात को प्राथमिकता देने से रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता के बीच केंद्र सरकार देश में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना चाहती है।

हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर प्रगति की खबरें हैं, लेकिन स्थिति अभी शुरुआती चरण में है। ऐसे में सरकार ने एहतियात के तौर पर निर्यात शुल्क बढ़ाने का फैसला लिया है।

क्या है विंडफॉल टैक्स?

विंडफॉल टैक्स ऐसा कर है, जिसे उन कंपनियों पर लगाया जाता है जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी हुई कीमतों का फायदा उठाकर असामान्य या अत्यधिक मुनाफा कमाती हैं। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक संकट के दौरान निर्यातकों को मिलने वाले अतिरिक्त लाभ को नियंत्रित करने के लिए यह टैक्स लगाया जाता है।

घरेलू आपूर्ति बनाए रखना प्राथमिकता

निर्यात को अपेक्षाकृत कम आकर्षक बनाकर सरकार का लक्ष्य देश के भीतर पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना है। गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों में बढ़ी अस्थिरता के बाद सरकार ने पहली बार मार्च में डीजल और ATF पर निर्यात शुल्क लगाया था। इसके बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार और कच्चे तेल की कीमतों के आधार पर इन दरों में कई बार संशोधन किया जा चुका है।

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