रक्षा क्षेत्र में भारत की बड़ी छलांग: हथियार निर्यात 686 करोड़ से बढ़कर 38,424 करोड़, 80 देशों तक पहुंचा ‘मेक इन इंडिया’

नई दिल्ली। ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत भारत ने रक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। केंद्र सरकार द्वारा जारी एक आधिकारिक फैक्ट शीट के अनुसार, देश का वार्षिक रक्षा निर्यात वर्ष 2013-14 के 686 करोड़ रुपए से बढ़कर 2025-26 में रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। वर्तमान में भारतीय रक्षा उपकरणों की मांग दुनिया के 80 से अधिक देशों में है।

सरकार द्वारा किए गए नीतिगत सुधारों और स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने वाली पहलों ने रक्षा क्षेत्र को नई दिशा दी है। रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP) 2020 और रक्षा खरीद मैनुअल (DPM) 2025 जैसी व्यवस्थाओं ने रक्षा उत्पादन प्रक्रियाओं को सरल बनाया है। साथ ही निजी क्षेत्र, स्टार्टअप्स और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) की भागीदारी भी बढ़ी है।

फैक्ट शीट के मुताबिक, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने आधुनिक रक्षा तकनीकों के विकास और उन्हें उपयोगी सैन्य प्रणालियों में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। डीआरडीओ और उद्योगों के सहयोग से कई स्वदेशी तकनीकों को रक्षा क्षेत्र में सफलतापूर्वक लागू किया गया है।

देश का रक्षा बजट भी पिछले एक दशक में उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। वर्ष 2013-14 में 2.53 लाख करोड़ रुपए का रक्षा बजट बढ़कर 2026-27 में 7.85 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। वहीं स्वदेशी रक्षा उत्पादन 2014-15 के 46,429 करोड़ रुपए से बढ़कर 2025-26 में 1.78 लाख करोड़ रुपए हो गया है।

अनुसंधान एवं विकास (R&D) क्षेत्र में भी निवेश में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। 2014-15 में जहां आरएंडडी के लिए 13,716 करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे, वहीं 2026-27 में यह राशि बढ़कर 29,100 करोड़ रुपए से अधिक हो गई है। यह 112 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि को दर्शाता है।

सरकार ने रक्षा अनुसंधान बजट का 25 प्रतिशत हिस्सा उद्योगों, स्टार्टअप्स और शैक्षणिक संस्थानों के लिए खोलकर नवाचार को बढ़ावा दिया है। इसके अलावा, डीआरडीओ की 24 प्रयोगशालाओं की परीक्षण सुविधाओं को निजी उद्योगों और स्टार्टअप्स के लिए उपलब्ध कराया गया है, जिससे स्वदेशी रक्षा तकनीकों के विकास को गति मिली है।

सरकार का कहना है कि रणनीतिक साझेदारियों, स्वदेशी रक्षा प्लेटफॉर्म और बढ़ते निवेश के माध्यम से भारत न केवल अपनी सैन्य क्षमता मजबूत कर रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक भरोसेमंद और जिम्मेदार रक्षा साझेदार के रूप में भी उभर रहा है। वर्ष 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव रखी जा चुकी है।

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