नागपुर। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को महाराष्ट्र के नागपुर स्थित अंबाझरी में यंत्र इंडिया लिमिटेड के आयुध निर्माण परिसर में 10,000 टन क्षमता वाले एल्युमिनियम एक्सट्रूजन प्रेस परियोजना का भूमि पूजन किया। इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी मौजूद रहे। इस परियोजना को देश की रक्षा और एयरोस्पेस उत्पादन क्षमता को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि इस परियोजना का लाभ आने वाले वर्षों तक देश की रक्षा व्यवस्था और नागपुर के विकास को मिलेगा। उन्होंने कहा कि भारत अब रक्षा जरूरतों के लिए विदेशों पर निर्भर रहने के बजाय स्वदेशी तकनीक और संसाधनों के बल पर आधुनिक रक्षा उपकरणों का निर्माण कर रहा है। यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत पहल है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि वैश्विक संघर्षों और युद्ध जैसी परिस्थितियों में सबसे पहले आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होती है। ऐसे समय में किसी भी देश के लिए रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब किसी देश के पास अपनी तकनीक, ज्ञान, संसाधन और क्षमता होती है, तब वह अपने राष्ट्रीय हितों की बेहतर सुरक्षा कर सकता है।
उन्होंने रक्षा क्षेत्र में देश की प्रगति का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2014 में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन 46 हजार करोड़ रुपये था, जो बढ़कर अब 1.78 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। वहीं रक्षा निर्यात भी 1,000 करोड़ रुपये से कम से बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अगले दो से तीन वर्षों में रक्षा उत्पादन को 3 लाख करोड़ रुपये और रक्षा निर्यात को 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस अभियान में भारतीय सेनाओं ने असाधारण साहस और दक्षता का प्रदर्शन किया। इसकी सफलता में स्वदेशी रक्षा उपकरणों और आधुनिक हथियारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने कहा कि मजबूत सेना के साथ अत्याधुनिक और विश्वसनीय रक्षा उपकरण भी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए उतने ही आवश्यक हैं।
नई एल्युमिनियम एक्सट्रूजन प्रेस परियोजना शुरू होने के बाद रक्षा क्षेत्र के लिए उच्च गुणवत्ता वाले एल्युमिनियम कॉम्पोनेंट्स देश में ही तैयार किए जा सकेंगे। इससे रक्षा और एयरोस्पेस उद्योग में स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा तथा महत्वपूर्ण उपकरणों के लिए विदेशों पर निर्भरता कम होगी।