ट्रेन में ऐसे तय होते हैं सीट नंबर, इस आसान ट्रिक से मिनटों में पहचानें अपनी बर्थ

नई दिल्ली। ट्रेन यात्रा के दौरान टिकट कन्फर्म होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि मिली हुई सीट लोअर बर्थ है, मिडिल है या अपर। कई यात्री सीट नंबर मिलने के बाद भी अपनी बर्थ की स्थिति को लेकर असमंजस में रहते हैं। हालांकि, भारतीय रेलवे की सीट नंबरिंग व्यवस्था को समझकर आप आसानी से पता लगा सकते हैं कि आपकी सीट किस प्रकार की है।

रेलवे लोअर बर्थ को आखिरी तक बचाकर रखता है

अक्सर लोगों को लगता है कि टिकट बुकिंग शुरू होते ही लोअर बर्थ की सभी सीटें भर जाती हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। रेलवे कई लोअर बर्थ सीटों को अंतिम चरण तक सुरक्षित रखता है। यही वजह है कि कई बार ट्रेन में सीमित सीटें बची होने पर भी यात्रियों को लोअर बर्थ आवंटित हो जाती है।

एक साथ नहीं भरते सभी कोच

रेलवे टिकट बुकिंग के दौरान किसी एक कोच को पूरी तरह भरने के बाद ही दूसरे कोच में सीटें नहीं देता। सिस्टम उपलब्धता के आधार पर अलग-अलग कोचों में सीटों का आवंटन करता है। इसलिए यात्रियों को अलग-अलग डिब्बों में सीट मिलने की संभावना बनी रहती है।

एक ही PNR पर भी अलग-अलग कोच में मिल सकती हैं सीटें

यदि ट्रेन में सीटों की उपलब्धता कम हो और किसी एक कोच में पर्याप्त सीटें न बची हों, तो रेलवे एक ही परिवार या समूह के यात्रियों को अलग-अलग कोचों में सीट आवंटित कर सकता है। यह स्थिति एक ही PNR पर टिकट बुक होने के बावजूद हो सकती है।

RAC और वेटिंग के लिए सीटें रहती हैं आरक्षित

रेलवे कुछ सीटों को पहले से ही RAC (Reservation Against Cancellation) और वेटिंग लिस्ट यात्रियों के लिए सुरक्षित रखता है। इसी कारण कई बार ट्रेन में सीटें खाली दिखाई देने के बावजूद यात्रियों को वेटिंग या RAC टिकट मिलता है।

सीट नंबर से ऐसे पहचानें अपनी बर्थ

भारतीय रेलवे की स्लीपर और एसी कोचों में सीट नंबर एक निश्चित क्रम में दिए जाते हैं। सामान्यतः:

  • 1 – लोअर बर्थ (LB)
  • 2 – मिडिल बर्थ (MB)
  • 3 – अपर बर्थ (UB)
  • 4 – लोअर बर्थ (LB)
  • 5 – मिडिल बर्थ (MB)
  • 6 – अपर बर्थ (UB)
  • 7 – साइड लोअर (SL)
  • 8 – साइड अपर (SU)

इसके बाद यही क्रम आगे की सीटों में दोहराया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि आपकी सीट संख्या 1, 4, 9, 12, 17 या 20 है, तो वह लोअर बर्थ हो सकती है। वहीं 7, 15, 23 जैसी सीटें आमतौर पर साइड लोअर श्रेणी में आती हैं।

रेलवे की इस सीट नंबरिंग प्रणाली को समझकर यात्री टिकट मिलने के साथ ही अपनी बर्थ की स्थिति का आसानी से पता लगा सकते हैं और यात्रा की बेहतर तैयारी कर सकते हैं।

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