नई दिल्ली। देश में रसोई गैस (LPG) की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार आयात के स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और समुद्री मार्गों पर संभावित जोखिमों को देखते हुए सरकारी तेल कंपनियां अमेरिका से एलपीजी आयात बढ़ाने की योजना पर काम कर रही हैं। इसका उद्देश्य खाड़ी देशों पर निर्भरता कम कर ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है।
जानकारी के अनुसार, भारत वर्तमान में अमेरिका से हर वर्ष लगभग 22 लाख टन (2.2 मिलियन टन) एलपीजी आयात करता है। अब इस मात्रा को बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही सरकार अल्जीरिया सहित अन्य देशों से भी एलपीजी आयात की संभावनाएं तलाश रही है, ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम की जा सके।
हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने के कारण एलपीजी आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी थीं। ऐसे समय में अमेरिका भारत के लिए एक प्रमुख वैकल्पिक आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरा और लगातार गैस की आपूर्ति जारी रखी।
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत के कुल एलपीजी आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 8 प्रतिशत से भी कम थी। हालांकि, इसके बाद इसमें लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई और वर्ष 2026 के जून महीने तक यह बढ़कर लगभग 65 प्रतिशत पहुंच गई। इसके अलावा भारत ने अर्जेंटीना, नाइजीरिया और मलेशिया जैसे देशों से भी एलपीजी खरीद बढ़ाकर अपनी आपूर्ति श्रृंखला को अधिक मजबूत बनाया है।
ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय ने तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को 30 दिनों का रणनीतिक एलपीजी भंडार (Strategic LPG Reserve) तैयार करने की योजना पर काम करने के निर्देश दिए हैं। यह भंडार मौजूदा 45 दिनों के सामान्य स्टॉक से अलग होगा। इसका उद्देश्य किसी युद्ध, प्रतिबंध या वैश्विक आपूर्ति संकट की स्थिति में भी देश में कम से कम एक महीने तक रसोई गैस की आपूर्ति निर्बाध बनाए रखना है।
सरकार का मानना है कि आयात के स्रोतों का विस्तार और रणनीतिक भंडारण व्यवस्था भविष्य में संभावित वैश्विक संकटों के दौरान देश की ऊर्जा सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाएगी।