नई दिल्ली। भारत में करीब 13.5 करोड़ लोग धूम्रपान की लत से जूझ रहे हैं और तंबाकू से जुड़ी बीमारियों के कारण हर साल बड़ी संख्या में लोगों की मौत होती है। ऐसे में ‘द लैंसेट रीजनल हेल्थ वेस्टर्न पैसिफिक’ में प्रकाशित एक नई रिसर्च ने धूम्रपान छोड़ने को लेकर नई उम्मीद जगाई है। अध्ययन में बताया गया है कि न्यूजीलैंड ने पारंपरिक तंबाकू नियंत्रण उपायों के साथ नियमन वाले निकोटीन विकल्पों (Regulated Nicotine Alternatives) को अपनाकर धूम्रपान की दर में उल्लेखनीय कमी हासिल की।
रिसर्च के अनुसार, एक समय न्यूजीलैंड में बड़ी आबादी नियमित रूप से धूम्रपान करती थी। टैक्स बढ़ाने, सिगरेट पैकेटों पर ग्राफिक चेतावनी और प्लेन पैकेजिंग जैसी नीतियों से धूम्रपान की दर में कमी आई, लेकिन 2018-19 में रेगुलेटेड निकोटीन विकल्पों को अपनाने के बाद इसमें और तेजी से गिरावट दर्ज की गई। 2022-23 तक देश में धूम्रपान करने वालों की दर 7 प्रतिशत से नीचे पहुंच गई।
अध्ययन में किए गए जॉइनपॉइंट रिग्रेशन विश्लेषण के मुताबिक, निकोटीन विकल्पों को शामिल करने के बाद धूम्रपान छोड़ने की रफ्तार पहले की तुलना में कई गुना बढ़ गई। इसके साथ ही 18 वर्ष की न्यूनतम आयु सीमा, फ्लेवर वाले उत्पादों पर नियंत्रण और डिस्पोजेबल वेप्स पर प्रतिबंध जैसे सख्त नियमों ने युवाओं में धूम्रपान की प्रवृत्ति कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भारतीय स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि देश को तंबाकू नियंत्रण की रणनीति में वैज्ञानिक और प्रमाण-आधारित उपायों को अधिक महत्व देने की आवश्यकता है। आकाश हेल्थकेयर के इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ तोमर के अनुसार, धूम्रपान से होने वाले अधिकांश नुकसान का कारण निकोटीन नहीं, बल्कि तंबाकू के जलने से निकलने वाले हजारों जहरीले रसायन हैं। वहीं, पैसिफिक वन हेल्थ हॉस्पिटल के कंसल्टेंट डॉ. सतीश कुमार श्री का कहना है कि लंबे समय से धूम्रपान करने वालों के लिए केवल पारंपरिक उपाय पर्याप्त नहीं हैं और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) पहले ही निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी (NRT) को अपनी आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल कर चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में भी तंबाकू नियंत्रण की मौजूदा रणनीति को मजबूत करते हुए वैज्ञानिक और प्रमाण-आधारित उपायों का विस्तार किया जाना चाहिए, ताकि धूम्रपान से होने वाली बीमारियों और मौतों में कमी लाई जा सके।