NDA दो-तिहाई बहुमत से सिर्फ 6 सांसद दूर, परिसीमन पर मानसून सत्र में बढ़ी सियासी हलचल

नई दिल्ली। संसद के 20 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र से पहले राष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। सबसे ज्यादा चर्चा परिसीमन (Delimitation) विधेयक को लेकर हो रही है। इस बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले के बयान ने राजनीतिक समीकरणों को नई दिशा दे दी है। उनके संकेतों के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि एनसीपी (शरद गुट) परिसीमन विधेयक पर सरकार का समर्थन कर सकती है, जिससे एनडीए को दो-तिहाई बहुमत के लक्ष्य तक पहुंचने में बड़ी मदद मिल सकती है।

दरअसल, अप्रैल 2026 में सरकार परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा से पारित नहीं करा सकी थी। उस समय आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने के कारण विधेयक अटक गया था। अब मानसून सत्र से पहले बदलते राजनीतिक हालात ने सरकार की उम्मीदें बढ़ा दी हैं।

सुप्रिया सुले के बयान से बदला सियासी माहौल

एनसीपी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले ने कहा है कि पार्टी नए परिसीमन विधेयक का मसौदा सामने आने के बाद अपना अंतिम फैसला करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सभी राज्यों में लगभग 50 प्रतिशत सीटों की समान रूप से बढ़ोतरी की जाती है, तो इस प्रस्ताव पर व्यापक सहमति बन सकती है। राजनीतिक विश्लेषक इसे सरकार के प्रति अपेक्षाकृत नरम रुख के रूप में देख रहे हैं।

अप्रैल में क्यों अटक गया था विधेयक?

अप्रैल 2026 में पेश किए गए संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पर सरकार को आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिला था। मतदान के दौरान सरकार के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े थे। उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के आधार पर सरकार को लगभग 352 मतों की आवश्यकता थी, लेकिन विपक्ष की एकजुटता के कारण यह संख्या पूरी नहीं हो सकी।

सरकार पहले ही दे चुकी है संकेत

विधेयक पर पिछली चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि यदि सभी राज्यों में समान रूप से सीटें बढ़ाने पर सहमति बनती है, तो सरकार इस दिशा में सकारात्मक निर्णय लेने के लिए तैयार है। अब सुप्रिया सुले की ओर से भी इसी तरह की बात सामने आने के बाद दोनों पक्षों के बीच सहमति बनने की संभावना बढ़ती दिख रही है।

बदलते राजनीतिक समीकरण

हाल के दिनों में महाराष्ट्र और दिल्ली की कई राजनीतिक बैठकों ने भी चर्चाओं को हवा दी है। एनसीपी (शरद गुट) के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल की शरद पवार और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात, वहीं दिल्ली में अमित शाह और एकनाथ शिंदे की बैठक ने राजनीतिक अटकलों को और तेज कर दिया है। इन घटनाक्रमों के बाद एनसीपी के संभावित रुख पर सभी की नजरें टिकी हैं।

अब डीएमके पर टिकी निगाहें

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि एनसीपी के बाद डीएमके भी परिसीमन विधेयक पर सरकार का समर्थन करती है, तो लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत का रास्ता काफी आसान हो सकता है। बताया जा रहा है कि सरकार इस मुद्दे पर दक्षिण भारत के दलों के साथ भी लगातार संवाद बनाए हुए है।

कांग्रेस की बढ़ी चिंता

एनसीपी के संभावित समर्थन की चर्चाओं के बीच कांग्रेस और INDIA गठबंधन के भीतर भी चिंता बढ़ गई है। विपक्षी दलों के नेताओं ने गठबंधन की एकजुटता बनाए रखने पर जोर दिया है। माना जा रहा है कि यदि शरद पवार किसी अहम मुद्दे पर सरकार के साथ खड़े होते हैं, तो इसका असर पूरे विपक्षी गठबंधन की रणनीति पर पड़ सकता है।

मानसून सत्र में होगा शक्ति परीक्षण

20 जुलाई से शुरू होने वाला संसद का मानसून सत्र केवल विधायी कार्यवाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए राजनीतिक ताकत की परीक्षा भी होगा। परिसीमन विधेयक पर विभिन्न दलों का अंतिम रुख तय करेगा कि सरकार अपने दो-तिहाई बहुमत के लक्ष्य के कितनी करीब पहुंचती है या विपक्ष एक बार फिर संख्या बल के दम पर उसे रोकने में सफल रहता है। आने वाले दिनों में संसद के भीतर बदलते राजनीतिक समीकरण राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।

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