नई दिल्ली। नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में हुए प्रदर्शनों और उसके बाद पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अहम सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, असम, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और केरल सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित अधिकारियों को घटनास्थलों के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह भी कहा कि जिन लोगों के खिलाफ पहले से कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था और प्रदर्शन के दौरान उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया, उनके खिलाफ फिलहाल कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
याचिकाकर्ताओं ने मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में विशेष जांच दल (SIT) से कराने, दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करने और भविष्य में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए देशभर में एक समान दिशा-निर्देश बनाने की मांग की है।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन नागरिकों का अधिकार है। उन्होंने कहा कि कई बार ऐसे आंदोलनों में बाहरी तत्व भी शामिल हो जाते हैं, जिससे स्थिति बिगड़ जाती है। अदालत ने यह भी कहा कि अब यह तय किए जाने की जरूरत है कि आंसू गैस जैसे बल प्रयोग के उपाय किन परिस्थितियों में और किस तरीके से किए जाएं।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकर नारायण ने आरोप लगाया कि पुलिस की कार्रवाई में कई गंभीर अनियमितताएं हुईं और कुछ घटनाओं के वीडियो भी उपलब्ध हैं। इस पर अदालत ने कहा कि मामले में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच आवश्यक है तथा कानून का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति की जवाबदेही तय की जाएगी।
वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता शादान फरासत ने अदालत को बताया कि बिहार में एफआईआर वापस लेने की घोषणा के बावजूद 150 से अधिक नाबालिग अब भी हिरासत में हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ बच्चों को निर्धारित समय से अधिक हिरासत में रखा गया और समय पर मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं किया गया।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि इस घटना में 250 पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि यदि छात्रों पर आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग हुआ है तो इसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार स्वतंत्र जांच के पक्ष में है और पूरी सच्चाई जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए अगली सुनवाई 3 अगस्त को निर्धारित की है।