इस्लामाबाद। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) द्वारा निकाले जा रहे लॉन्ग मार्च के दौरान हिंसा भड़कने से कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। घायलों में कई की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
जेएएसी ने सोशल मीडिया पर जारी जानकारी में बताया कि लॉन्ग मार्च का कारवां रावलकोट पहुंच चुका है। संगठन के अनुसार, मृतकों में अधिकांश की पहचान हो चुकी है, जबकि एक व्यक्ति की पहचान अभी नहीं हो सकी है। प्रदर्शनकारियों ने रावलकोट के चांदनी चौक पर एकत्र होकर आगे की रणनीति पर चर्चा करने की घोषणा की है।
यह प्रदर्शन जेएएसी और पाकिस्तानी प्रशासन के बीच वार्ता विफल रहने के बाद शुरू हुआ। मार्च की शुरुआत मीरपुर डिवीजन से हुई थी और इसके बाद प्रदर्शनकारी मुजफ्फराबाद की ओर बढ़ रहे थे।
इस बीच, यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (UKPNP) ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान पीओके में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की ओर आकर्षित किया है। संगठन ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने रावलकोट में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया, जिसमें गोलीबारी, आंसू गैस और अन्य तरीकों का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
पीओके में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, कई इलाकों में आवाजाही और संचार सेवाओं पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं।
इस घटनाक्रम पर भारत ने भी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पीओके में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित कार्रवाई और मानवाधिकार उल्लंघन की खबरें चिंताजनक हैं। उन्होंने कहा कि भारत को उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस मामले में पाकिस्तान से जवाबदेही सुनिश्चित करेगा।