नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा ने सोमवार को ‘बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल’ को भारी हंगामे और विपक्ष के वॉकआउट के बीच ध्वनि मत से पारित कर दिया। नया विधेयक 1891 के बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट की जगह लेगा। इसका उद्देश्य बैंकिंग रिकॉर्ड से जुड़े कानूनी प्रावधानों को आधुनिक डिजिटल बैंकिंग व्यवस्था के अनुरूप बनाना है।
डिजिटल बैंकिंग के दौर में पुराने कानून में बदलाव जरूरी
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विधेयक को सदन में पेश करते हुए कहा कि मौजूदा कानून करीब 135 साल पहले उस दौर में बनाया गया था, जब बैंकिंग रिकॉर्ड मुख्य रूप से कागजों और लेजर में रखे जाते थे।
उस समय कानून का उद्देश्य अदालतों में बैंक रिकॉर्ड की प्रमाणित प्रतियों को साक्ष्य के रूप में स्वीकार करने की व्यवस्था करना था, ताकि बैंक कर्मचारियों को हर मामले में मूल रिकॉर्ड लेकर अदालत में उपस्थित न होना पड़े।
वित्त मंत्री ने कहा कि डिजिटल बैंकिंग के तेजी से विस्तार के बाद वित्तीय रिकॉर्ड तैयार करने और सुरक्षित रखने का तरीका पूरी तरह बदल गया है। ऐसे में कानूनी व्यवस्था को भी मौजूदा तकनीकी परिस्थितियों के अनुरूप बनाना जरूरी है।
ग्राहकों की गोपनीयता और सुरक्षा पर जोर
नए विधेयक में बैंकिंग और वित्तीय रिकॉर्ड से जुड़े मामलों में डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। सरकार का कहना है कि आधुनिक डिजिटल बैंकिंग व्यवस्था में इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उनके इस्तेमाल से जुड़े कानूनी पहलुओं को स्पष्ट करना जरूरी है।
विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष का हंगामा
विधेयक पर चर्चा के दौरान सदन में विपक्षी सदस्यों की ओर से लगातार नारेबाजी हुई। उप-सभापति ने विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे से विधेयक के प्रावधानों तक अपनी बात सीमित रखने का आग्रह किया और कहा कि नियमों के तहत उन्हें अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा।
इसके बाद सदन में तीखी बहस भी हुई। उप-सभापति ने अन्य सदस्यों से भी चर्चा को विधेयक के विषय तक सीमित रखने का अनुरोध किया।
कई राज्यों के सांसदों ने चर्चा में लिया हिस्सा
विधेयक पर चर्चा में पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना और तमिलनाडु समेत विभिन्न राज्यों के सांसदों ने हिस्सा लिया।
चर्चा में शामिल अधिकांश सदस्यों ने बैंकिंग कानून में लंबे समय से अपेक्षित तकनीकी बदलाव का समर्थन किया। साथ ही नए कानून में डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों को महत्वपूर्ण बताया गया।
भारी हंगामे और विपक्ष के वॉकआउट के बीच राज्यसभा ने विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया। इसके साथ ही 1891 में बनाए गए बैंकर्स बुक्स एविडेंस कानून को बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।