चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने विधानसभा में संभावित परिसीमन प्रक्रिया के विरोध में एक महत्वपूर्ण विशेष प्रस्ताव पेश किया है। प्रस्ताव का उद्देश्य राज्य के मौजूदा संसदीय प्रतिनिधित्व की रक्षा करना और दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक अधिकारों को सुरक्षित रखने की मांग करना है।
लोकसभा की 543 सीटें बनाए रखने की मांग
विधानसभा की कार्यसूची के तहत पेश किए गए प्रस्ताव में केंद्र सरकार से मांग की गई है कि लोकसभा की कुल सीटों की संख्या वर्तमान 543 पर ही बरकरार रखी जाए। प्रस्ताव में कहा गया है कि राज्यों के बीच मौजूदा संसदीय सीटों के हिस्से में किसी भी तरह की कटौती नहीं होनी चाहिए।
प्रस्ताव में यह भी उल्लेख किया गया है कि लोकसभा में सीटों का मौजूदा आवंटन लंबे समय से 1971 की जनगणना के आंकड़ों से जुड़ा हुआ है। ऐसे में भविष्य में होने वाले परिसीमन के कारण राज्यों के प्रतिनिधित्व में बदलाव को लेकर चिंता जताई गई है।
जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों को नुकसान की आशंका
प्रस्ताव में संभावित परिसीमन को लेकर विशेष चिंता जाहिर की गई है। इसमें कहा गया है कि दक्षिणी राज्यों ने केंद्र के दिशा-निर्देशों के अनुरूप जनसंख्या नियंत्रण के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया है। साथ ही इन राज्यों ने शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक-आर्थिक विकास के कई मानकों में भी सुधार किया है।
ऐसे में यदि जनसंख्या के आधार पर लोकसभा सीटों का नए सिरे से परिसीमन किया जाता है, तो इन राज्यों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मामले में नुकसान होने की आशंका है।
दक्षिणी राज्यों के अधिकारों की रक्षा पर जोर
तमिलनाडु सरकार के इस प्रस्ताव में राज्यों के बीच मौजूदा राजनीतिक संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया गया है। प्रस्ताव के जरिए मांग की गई है कि जनसंख्या नियंत्रण और विकास के लिए प्रभावी कदम उठाने वाले राज्यों को परिसीमन की प्रक्रिया में राजनीतिक प्रतिनिधित्व के नुकसान का सामना न करना पड़े।
यह प्रस्ताव ऐसे समय में सामने आया है, जब देश में भविष्य के परिसीमन और लोकसभा सीटों के संभावित पुनर्विन्यास को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।