देवी प्रसाद चौबे ने गांव-गांव पहुंचाई राष्ट्र निर्माण और जागरूकता की भावना : डॉ. रमन सिंह

  • 26वें वसुंधरा प्रतिष्ठा समारोह में पत्रकार-संस्कृतिकर्मी राजेश गनोदवाले को वसुंधरा सम्मान

भिलाई, 14 अगस्त। लोकजागरण की संस्था वसुंधरा एवं  चतुर्भुज मेमोरियल फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में स्वर्गीय देवी प्रसाद चौबे की 50वीं पुण्य स्मृति के अवसर पर 26वें वसुंधरा प्रतिष्ठा समारोह का आयोजन शुक्रवार को भिलाई के महात्मा गांधी कला मंदिर, सिविक सेंटर में किया गया। समारोह में छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह मुख्य अतिथि तथा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत अध्यक्ष के रूप में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने स्वर्गीय देवी प्रसाद चौबे के चित्र पर माल्यार्पण कर की। इस अवसर पर शास्त्रीय संगीत, लोककला, लोकसंस्कृति और रंगमंच जैसे विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाले वरिष्ठ पत्रकार एवं संस्कृतिकर्मी  राजेश गनोदवाले को 26वें वसुंधरा सम्मान से सम्मानित किया गया।

समारोह में कृति ‘बहुमत’ एवं ‘वसुंधरा’ के विशेषांक का विमोचन भी किया गया। ‘वसुंधरा’ का विशेषांक छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पंडवानी गायिका एवं पद्म विभूषण से सम्मानित स्वर्गीय तीजन बाई के व्यक्तित्व और कृतित्व पर केंद्रित है।

गांव-गांव पहुंचाई राष्ट्र निर्माण की भावना : डॉ. रमन सिंह

समारोह को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि स्वर्गीय देवी प्रसाद चौबे ग्रामीण पत्रकारिता से जुड़े रहे और उन्होंने कम उम्र में ही युवाओं एवं किसानों को संगठित करने तथा स्वतंत्रता और राष्ट्र निर्माण की भावना को गांव-गांव तक पहुंचाने का कार्य शुरू कर दिया था। इसी दौरान उनका संपर्क छत्तीसगढ़ में सहकारिता आंदोलन के जनक स्वर्गीय ठाकुर प्यारेलाल सिंह से हुआ। वे उनके साथ गांव-गांव घूमे और लोगों को राष्ट्र निर्माण के लिए जागरूक किया।

डॉ. सिंह ने कहा कि महात्मा गांधी के बाद छत्तीसगढ़ में जिन महापुरुषों से देवी प्रसाद चौबे सर्वाधिक प्रभावित रहे, उनमें ठाकुर प्यारेलाल सिंह प्रमुख थे। उनका जुड़ाव केवल व्यक्तिगत प्रभाव तक सीमित नहीं था, बल्कि वे उनके विचारों और सामाजिक दृष्टिकोण से भी गहराई से जुड़े रहे। गांव, श्रमिक, युवा और आम आदमी को राष्ट्र निर्माण के केंद्र में रखने की यही सोच आगे चलकर वसुंधरा सम्मान की मूल प्रेरणा बनी।

उन्होंने कहा कि पिछले 26 वर्षों में वसुंधरा सम्मान के माध्यम से अनेक प्रतिष्ठित पत्रकारों, संपादकों और साहित्यकारों को सम्मानित किया गया है, जिनका योगदान प्रदेश ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण रहा है। यह परंपरा आज भी निरंतर आगे बढ़ रही है, जो अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।

छत्तीसगढ़ की संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान दिलाई

डॉ. रमन सिंह ने सम्मानित  राजेश गनोदवाले को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने लगभग तीन दशकों तक राष्ट्रीय पत्रिका में छत्तीसगढ़ की लोककला, लोकसंगीत और शास्त्रीय विधाओं पर निरंतर लेखन किया। उनके लेखन ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पत्रकारिता और समाज के लिए उनके इस विशिष्ट योगदान को लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

छत्तीसगढ़ में विकसित हो भारत भवन जैसा सांस्कृतिक संस्थान : चरणदास महंत

समारोह की अध्यक्षता कर रहे विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि भारतीय संस्कृति, पुरानी परंपराओं और समाज के लिए महत्वपूर्ण योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित करने की परंपरा को आगे बढ़ाना आवश्यक है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक संस्थाओं और परंपराओं के संरक्षण पर जोर दिया।

डॉ. महंत ने भोपाल के भारत भवन का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह भारत भवन ने कला, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है, उसी तरह छत्तीसगढ़ में भी एक स्थायी सांस्कृतिक संस्थान विकसित किया जाना चाहिए, जो आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति, कला और परंपराओं से जोड़ने का कार्य करे।

‘भारतीय ज्ञान परंपरा में संस्कृति, इतिहास एवं पत्रकारिता’ पर संगोष्ठी

समारोह में ख्यातिलब्ध विचारक, लेखक एवं संपादक  शशांक शर्मा ने ‘भारतीय ज्ञान परंपरा में संस्कृति, इतिहास एवं पत्रकारिता’ विषय पर आयोजित वैचारिक संगोष्ठी को संबोधित किया। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति, इतिहास और पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।

वहीं 26वें वसुंधरा सम्मान से सम्मानित  राजेश गनोदवाले ने अपनी पत्रकारिता यात्रा और अनुभवों को साझा किया।

कार्यक्रम में वैशाली नगर विधायक  रिकेश सेन, पूर्व मंत्री  रविन्द्र चौबे,  प्रदीप चौबे, संयोजक  विनोद मिश्र, सचिव निर्णायक समिति श्वेता उपाध्याय,  सतीश जायसवाल,  ई.वी. मुरली सहित बड़ी संख्या में पत्रकार, साहित्यकार, संस्कृतिकर्मी एवं प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।

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