आजादी के इतिहास में नया अध्याय, लाल किले से पहली बार गूंजेगा ‘वंदे मातरम’

नई दिल्ली: देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से इतिहास में पहली बार राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के पूर्ण स्वरूप की प्रस्तुति की जाएगी। गीत की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले इस विशेष कार्यक्रम में इसके सभी छह छंदों का गायन किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में होने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोह में ‘वंदे मातरम’ का गायन राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ से पहले होगा।

अब तक स्वतंत्रता दिवस समारोहों में राष्ट्रगीत के शुरुआती दो पद ही प्रमुख रूप से प्रस्तुत किए जाते रहे हैं। इस बार परंपरा से अलग हटकर ‘वंदे मातरम’ के विस्तृत स्वरूप को समारोह में शामिल किया गया है। नए दिशा-निर्देशों के तहत राष्ट्रीय समारोहों में राष्ट्रगान से पहले राष्ट्रगीत के पूर्ण स्वरूप की प्रस्तुति को प्राथमिकता दी जाएगी।

‘विकसित भारत’ और युवा शक्ति पर रहेगा फोकस

इस वर्ष का आयोजन राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ की 150 वर्ष पुरानी विरासत को याद करने के साथ-साथ वर्ष 2047 तक भारत को ‘विकसित भारत’ बनाने की यात्रा में युवा शक्ति की ऊर्जा, आकांक्षाओं और योगदान को समर्पित रहेगा।

समारोह के दौरान भारतीय वायुसेना के एमआई-17 हेलीकॉप्टर द्वारा पुष्प वर्षा भी की जाएगी। इस दौरान ‘वंदे मातरम’ अंकित विशेष ध्वज के साथ हेलीकॉप्टर उड़ान भरेगा।

‘वंदे मातरम’ को लेकर संसद में भी हुई चर्चा

हाल ही में संसद ने राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक पारित किया है। इसमें ‘वंदे मातरम’ को अपमान के कृत्यों से कानूनी सुरक्षा देने का प्रावधान किया गया है। इस मुद्दे को लेकर संसद में राजनीतिक बहस भी देखने को मिली। डीएमके ने विधेयक का विरोध करते हुए सरकार पर राष्ट्रीय गीत के जरिए देश को विभाजित करने का आरोप लगाया, जबकि भाजपा ने संशोधन का बचाव किया।

1875 में हुई थी ‘वंदे मातरम’ की रचना

राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ की रचना प्रसिद्ध साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 7 नवंबर 1875 को की थी। यह गीत भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशवासियों के लिए प्रेरणा का महत्वपूर्ण स्रोत बना। इसकी रचना संस्कृत और बंगाली के मिश्रण में की गई थी।

बाद में इसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ में 1882 में प्रकाशित किया गया। उपन्यास में यह गीत एक संन्यासी द्वारा गाया गया था।

ऐसे होगा लाल किले पर स्वतंत्रता दिवस समारोह

स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए लाल किले पहुंचने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह करेंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री को दिल्ली एरिया के जीओसी से मिलवाया जाएगा।

प्रधानमंत्री को ‘सैल्यूटिंग बेस’ तक ले जाया जाएगा, जहां इंटर-सर्विसेज और दिल्ली पुलिस का संयुक्त गार्ड उन्हें ‘जनरल सैल्यूट’ देगा। इसके बाद प्रधानमंत्री ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ का निरीक्षण करेंगे।

गार्ड ऑफ ऑनर में सेना, नौसेना, वायुसेना और दिल्ली पुलिस से एक-एक अधिकारी तथा 24-24 जवान शामिल होंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर पर पहुंचेंगे और राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे।

पहले ‘वंदे मातरम’, फिर राष्ट्रगान

ध्वजारोहण के बाद तिरंगे को राष्ट्रीय सलामी दी जाएगी। सेना का बैंड ‘वंदे मातरम’ की धुन बजाएगा और लाल किले में मौजूद लोग राष्ट्रगीत का गायन करेंगे। इसके बाद राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ प्रस्तुत किया जाएगा।

राष्ट्रगान के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को संबोधित करेंगे। इस तरह इस वर्ष का स्वतंत्रता दिवस समारोह ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने और भारत की विकसित राष्ट्र बनने की आकांक्षा के बीच एक ऐतिहासिक अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *