जिला न्यायालय दुर्ग में POSH Act एवं श्रम कानूनों पर जागरूकता कार्यशाला: सुरक्षित कार्यस्थल की दिशा में ‘साझा ज़िम्मेदारी’ का संदेश

दुर्ग। जिला न्यायालय दुर्ग के नवीन सभागार में कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न की रोकथाम, निषेध एवं निवारण अधिनियम 2013 (POSH Act) तथा महिलाओं के अधिकार एवं श्रम कानूनों को लेकर विशेष जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का मुख्य संदेश “Safe Workplace is Everyone’s Responsibility” रहा।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के. विनोद कुजूर रहे। उनके अलावा कुटुंब न्यायालय की प्रधान न्यायाधीश सुमन एक्का, विशाखा समिति की अध्यक्ष सुनीता टोप्पो, समिति के सदस्य, न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता संघ दुर्ग के पदाधिकारी एवं अधिवक्तागण तथा श्रम विभाग की लेबर इंस्पेक्टर उपस्थित रहीं।

कार्यशाला में सुरक्षित एवं सम्मानजनक कार्यस्थल को केवल नियमों तक सीमित न रखते हुए इसे पूरे संस्थान की साझा जिम्मेदारी के रूप में समझाया गया। खास बात यह रही कि POSH Act को केवल महिलाओं से संबंधित विषय मानने के बजाय न्यायालय के पुरुष अधिकारियों एवं कर्मचारियों को भी इस जागरूकता कार्यक्रम में सक्रिय रूप से शामिल किया गया।

तकनीकी सत्र में षष्टम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्यामवती मरावी ने POSH Act 2013 के प्रमुख प्रावधानों, आंतरिक शिकायत समिति के गठन तथा शिकायतों की निष्पक्ष और संवेदनशील जांच की प्रक्रिया के संबंध में व्यावहारिक जानकारी दी।

दूसरे सत्र में स्थायी लोक अदालत की अध्यक्ष सुषमा लकड़ा ने श्रम कानूनों के महत्वपूर्ण प्रावधानों पर जानकारी साझा की। उन्होंने मातृत्व लाभ, कार्य के घंटे, समान अवसर तथा महिलाओं के कार्यस्थल से जुड़े अधिकारों के बारे में प्रतिभागियों को विस्तार से बताया।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री के. विनोद कुजूर ने कार्यस्थल पर गरिमा, परस्पर सम्मान और संवेदनशील व्यवहार को संस्थागत संस्कृति का अनिवार्य हिस्सा बताया। उन्होंने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल के निर्माण में अपनी जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का समापन चतुर्थ अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (FTSC POCSO) श्री अनीश दुबे के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

कार्यशाला में यह संदेश दिया गया कि POSH Act केवल शिकायत होने के बाद लागू होने वाला कानून नहीं है, बल्कि कार्यस्थल पर सम्मान, संवेदनशीलता, समानता और जवाबदेही की संस्कृति विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। सुरक्षित कार्यस्थल के निर्माण में संस्थान के प्रत्येक कर्मचारी की भूमिका महत्वपूर्ण है।

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