TMC सांसद महुआ मोइत्रा की मुश्किलें बढ़ीं, अदालत की सख्ती के बाद वारंट जारी

नदिया। तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। एक शिकायत मामले में कृष्णानगर की तृतीय न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। नदिया जिला पुलिस अधीक्षक अतुल वी. ने भी वारंट जारी होने की पुष्टि की है।

पुलिस अधीक्षक के मुताबिक, यह मामला भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 227 के तहत दायर शिकायत से जुड़ा है। शिकायत की सुनवाई के दौरान अदालत की ओर से महुआ मोइत्रा को कई बार समन जारी किए गए थे। निर्धारित प्रक्रिया के तहत समन जारी होने के बावजूद अदालत में पेश नहीं होने पर न्यायालय ने अब गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश दिया है।

कई धाराओं के तहत शिकायत

पुलिस के अनुसार, शिकायत मामले में महुआ मोइत्रा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराएं लगाई गई हैं। इनमें धारा 79, महिला की मर्यादा का अपमान करने; धारा 196, विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य को बढ़ावा देने; धारा 299, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से किए गए जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य; धारा 351, आपराधिक धमकी तथा धारा 353(2), सार्वजनिक अशांति या लोक व्यवस्था को प्रभावित करने वाले बयान से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।

नदिया जिला पुलिस अधीक्षक अतुल वी. ने कहा कि शिकायत मामले में अदालत द्वारा निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया है और उसी प्रक्रिया के तहत वारंट जारी हुआ है।

नदिया प्रशासन पर महुआ ने लगाए थे आरोप

इस मामले से पहले महुआ मोइत्रा ने नदिया प्रशासन पर कथित अपमानजनक व्यवहार का आरोप लगाया था। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष नदिया जिले के तीन वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस भी दायर किया है। इसमें उन्होंने संसदीय प्रोटोकॉल के उल्लंघन और कथित अपमानजनक आचरण का आरोप लगाया है।

सर्किट हाउस खाली कराने को लेकर हुआ था विवाद

विवाद 14 अगस्त की घटना से जुड़ा है। महुआ मोइत्रा के अनुसार, वह 14 अगस्त को शाम करीब 6:15 बजे नदिया सर्किट हाउस पहुंची थीं और उन्हें उनका नियमित कमरा दिया गया था। उन्होंने दावा किया कि वहां उन्हें चाय और भोजन भी परोसा गया।

महुआ मोइत्रा के मुताबिक, रात करीब 9:47 बजे अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट ने उन्हें फोन कर सर्किट हाउस खाली करने के लिए कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी ने यह निर्देश ‘ऊपर से’ आने की बात कही थी। इसके बाद डिप्टी कलेक्टर की ओर से व्हाट्सऐप संदेश आया, जिसमें 12 अगस्त का एक आदेश भेजा गया था। आदेश में सर्किट हाउस में रखरखाव और सफाई कार्य का हवाला दिया गया था।

फिलहाल गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। अब अदालत में आगे की कार्यवाही और पुलिस की कार्रवाई पर नजर रहेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *