नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच बड़ी कूटनीतिक खबर सामने आई है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत दौरे पर आ सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, शी जिनपिंग अगले महीने नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। वर्ष 2020 में हुई हिंसक सीमा झड़प के बाद यह दौरा दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की दिशा में अहम संकेत माना जा रहा है।
400 अधिकारियों का बड़ा प्रतिनिधिमंडल
सूत्रों के अनुसार, शी जिनपिंग के साथ चीन का करीब 400 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भारत आ सकता है। इससे पहले 2019 में शी जिनपिंग की भारत यात्रा के दौरान उनके साथ 200 से कम अधिकारी आए थे। भारतीय सूत्रों के मुताबिक, चीनी अधिकारी दौरे की तैयारियों के तहत दिल्ली में होटल बुकिंग और सुरक्षा व्यवस्था को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
सीमा विवाद पर रहेगी नजर
शी जिनपिंग के भारत दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच सीमा विवाद प्रमुख मुद्दों में शामिल रह सकता है। 2020 की हिंसक झड़प के बाद भारत-चीन सीमा पर लंबे समय तक सैन्य तनाव बना रहा। हालांकि, हालिया डिसइंगेजमेंट समझौते के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य गतिरोध में कुछ कमी आई है।
इसी बीच भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल भी सीमा विवाद को लेकर चीन में अहम वार्ता कर रहे हैं। उनकी चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ बातचीत को दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
BRICS को मजबूत करने पर जोर
भारत और चीन भले ही एशिया में रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं, लेकिन BRICS जैसे वैश्विक मंचों पर दोनों देशों के कई साझा हित हैं। खासकर अमेरिकी व्यापार नीतियों के बीच BRICS सहयोग को मजबूत करने पर दोनों देशों का जोर रहा है।
चीन के विदेश मंत्रालय ने भारत की अध्यक्षता में होने वाले BRICS सम्मेलन की सफलता का समर्थन करने की बात कही है। ऐसे में शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा को BRICS के भीतर सहयोग मजबूत करने और भारत-चीन संबंधों में नई शुरुआत के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।