गेहूं आटा, मैदा और सूजी के निर्यात से हटी रोक, केंद्र सरकार ने कारोबारियों को दी बड़ी राहत

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कृषि और निर्यात क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों को बड़ी राहत देते हुए गेहूं के आटे और उससे बने अन्य उत्पादों के निर्यात पर लगी रोक तत्काल प्रभाव से हटा दी है। सरकार के इस फैसले के बाद अब भारतीय कारोबारी मैदा, सूजी और साबुत गेहूं के आटे समेत संबंधित उत्पादों का विदेशी बाजारों में सामान्य रूप से निर्यात कर सकेंगे।

सोमवार को केंद्र सरकार ने गेहूं के आटे और उससे जुड़े खाद्य उत्पादों की निर्यात नीति में अहम संशोधन किया। नए फैसले के तहत वर्ष 2022 से लागू पुराने निर्यात प्रतिबंध समाप्त कर दिए गए हैं। इससे फूड प्रोसेसिंग सेक्टर, फ्लोर मिलों और निर्यात कारोबार से जुड़े उद्योगों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।

2022 में बढ़ती कीमतों के कारण लगा था प्रतिबंध

गौरतलब है कि घरेलू बाजार में गेहूं और आटे की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए भारत सरकार ने 12 जुलाई 2022 को इनके निर्यात पर पाबंदी लगाई थी। उस समय रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर गेहूं की आपूर्ति प्रभावित हुई थी और कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला था।

काला सागर क्षेत्र से गेहूं की आपूर्ति और जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने के कारण दुनिया के कई देशों में गेहूं की किल्लत पैदा हो गई थी। ऐसे में भारत से निर्यात बढ़ने लगा, जिससे घरेलू बाजार में कीमतें बढ़ने की आशंका थी। आम उपभोक्ताओं को महंगाई से बचाने और देश की घरेलू जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने निर्यात पर रोक लगाई थी।

निर्यात को मिलेगी नई रफ्तार

अब बाजार में पर्याप्त उपलब्धता और बदली परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने प्रतिबंध हटाने का फैसला किया है। इससे भारतीय गेहूं उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहुंच मिलेगी और निर्यात कारोबार को गति मिलने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस फैसले से फ्लोर मिलों, फूड प्रोसेसिंग कंपनियों और कृषि आधारित निर्यात कारोबारियों को बड़ा लाभ होगा। साथ ही, विदेशी बाजारों में भारतीय मैदा, सूजी और आटे की बढ़ती मांग को पूरा करने में भी मदद मिलेगी।

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