नई दिल्ली। सरकारी स्कूलों में बिना अनुमति प्रवेश कर वीडियो बनाने, फोटोग्राफी, इंटरव्यू और लाइव स्ट्रीमिंग पर रोक लगाने वाले उत्तर प्रदेश और राजस्थान सरकार के आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी गई है। अदालत के इस फैसले के बाद दोनों राज्यों में लागू स्कूलों से जुड़े प्रतिबंध बरकरार रहेंगे।
अनुच्छेद 32 के तहत सुनवाई से इनकार
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ ने अधिवक्ता नरेंद्र मिश्रा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। याचिकाकर्ता की ओर से दावा किया गया था कि स्कूलों में प्रवेश और वीडियोग्राफी पर लगाए गए प्रतिबंध संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 21-A के तहत मिले मौलिक अधिकारों को प्रभावित करते हैं।
याचिका में यह भी दलील दी गई थी कि स्वतंत्र रूप से स्कूलों की स्थिति का दस्तावेजीकरण होने से शौचालय, पेयजल, मिड-डे मील और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी कमियां सामने आ सकती हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अनुच्छेद 32 के तहत हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के बाद बढ़ा विवाद
सरकारी स्कूलों में यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के प्रवेश को लेकर विवाद ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के बाद तेज हुआ। इस दौरान कई जगह बाहरी लोगों द्वारा स्कूल परिसरों में पहुंचकर वीडियो बनाने की शिकायतें सामने आईं।
लखनऊ के एक स्कूल में बिना अनुमति यूट्यूबर्स के पहुंचने और शिक्षिकाओं पर कथित तौर पर दबाव बनाने की घटना के बाद शिक्षकों और अभिभावकों में नाराजगी भी सामने आई थी।
अगस्त में जारी हुए थे सख्त सर्कुलर
स्कूलों में बच्चों की गोपनीयता, शैक्षणिक वातावरण और शिक्षकों की गरिमा को ध्यान में रखते हुए राजस्थान सरकार ने 16 अगस्त 2026 और उत्तर प्रदेश सरकार ने 19 अगस्त 2026 को सर्कुलर जारी किए थे।
इन निर्देशों के तहत पत्रकारों, यूट्यूबर्स, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, सामाजिक संस्थाओं और अन्य बाहरी लोगों को बिना सक्षम शिक्षा अधिकारी की पूर्व अनुमति के स्कूल परिसर में प्रवेश, फोटो-वीडियोग्राफी, ऑडियो रिकॉर्डिंग और लाइव स्ट्रीमिंग की अनुमति नहीं होगी।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद इन राज्यों में स्कूल परिसरों में बिना अनुमति प्रवेश और रिकॉर्डिंग पर लागू प्रतिबंध फिलहाल कायम रहेंगे।